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हिन्दी में शोध का धंधा – डॉ. अमरनाथ

वैश्वीकरण के बाद अनुसंधान के क्षेत्र में और भी तेजी से गिरावट आई है. अब तो हमारे देश की पहली श्रेणी की प्रतिभाएं मोटी रकम कमाने के चक्कर में मैनेजर, डॉक्टर और इंजीनियर बनना चाहती हैं और जल्दी से जल्दी विदेश उड़ जाना चाहती हैं. किसी ट्रेडिशनल विषय में पोस्टग्रेजुएट करके शोध करना उन्हें नहीं भाता. जो डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाते वे ही अब मजबूरी में शोध का क्षेत्र चुन रहे हैं. वैश्वीकरण और बाजारवाद ने नयी प्रतिभाओं का चरित्र ही बदल दिया है. … Continue readingहिन्दी में शोध का धंधा – डॉ. अमरनाथ