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नामवर सिंह : हिंदी आलोचना के ‘मेहतर’- प्रो. सुभाष चन्द्र

नामवर सिंह ने जब हिन्दी समीक्षा में पदार्पण किया तो वह समय न केवल हिन्दी रचना व आलोचना के लिए महत्त्वपूर्ण था, बल्कि दर्शन व साहित्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया में गर्मागर्म बहस छिड़ी हुई थी। नामवर सिंह को उस परम्परा में भी संघर्ष करना पड़ा, जिसको वे आगे बढ़ाना चाहते थे और इसके विरोधियों से तो टक्कर लेने के लिए वे मैदान में उतरे ही थे। (लेख से ) … Continue readingनामवर सिंह : हिंदी आलोचना के ‘मेहतर’- प्रो. सुभाष चन्द्र