Tag: हिंदी आलोचना

निर्मला जैन : आलोचना में पुरुष वर्चस्व को पहली चुनौती – अमरनाथ

“हिंदी के आलोचक” शृंखला में कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अमरनाथ ने 50 से अधिक हिंदी-आलोचकों के अवदान को रेखांकित करते हुए उनकी आलोचना दृष्टि के विशिष्ट बिंदुओं को उद्घाटित किया है। इन आलोचकों पर यह अद्भुत सामग्री यहां प्रस्तुत है। इस शृंखला को आप यहां पढ़ सकते हैं। … Continue readingनिर्मला जैन : आलोचना में पुरुष वर्चस्व को पहली चुनौती – अमरनाथ

प्रेमचंद के अद्वितीय व्याख्याता : कमल किशोर गोयनका – अमरनाथ

बुलंदशहर (उ.प्र.) के एक व्यवसायी परिवार में जन्मे और जाकिर हुसेन कॉलेज (साँध्य), दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे कमल किशोर गोयनका ( 11.10.1938 ) ने अपने जीवन का तीन चौथाई हिस्सा प्रेमचंद के अध्ययन और अनुसंधान में खपा दिया. उन्होंने प्रेमचंद साहित्य पर अपनी पी-एच.डी. और डी.लिट्. तो किया ही, उसके बाद भी प्रेमचंद साहित्य का अनुशीलन और संपादन करते हुए उनपर 30 से अधिक पुस्तकें रच डालीं. … Continue readingप्रेमचंद के अद्वितीय व्याख्याता : कमल किशोर गोयनका – अमरनाथ

मार्क्सवादी ऋषि:आचार्य रामविलास शर्मा – डॉ.अमरनाथ

रामविलास शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य के गोल्डमेडलिस्ट थे, डॉक्टरेट थे और बलवंत राजपूत कॉलेज आगरा में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे किन्तु उन्होंने अपना सारा महत्वपूर्ण लेखन अपनी जातीय भाषा हिन्दी में किया। उन्होंने भाषाविज्ञान की किताबें हिन्दी में लिखकर यहां के बुद्धिजीवी वर्ग की औपनिवेशिक जड़ मानसिकता पर प्रहार तो किया ही, अपनी जाति के प्रति त्याग की एक अद्भुत मिशाल कायम की। … Continue readingमार्क्सवादी ऋषि:आचार्य रामविलास शर्मा – डॉ.अमरनाथ

आचार्य रामचंद्र तिवारी : सारस्वतबोध के प्रतिमान – डॉ. अमरनाथ

“हिंदी के आलोचक” शृंखला में कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अमरनाथ ने 50 से अधिक हिंदी-आलोचकों के अवदान को रेखांकित करते हुए उनकी आलोचना दृष्टि के विशिष्ट बिंदुओं को उद्घाटित किया है। इन आलोचकों पर यह अद्भुत सामग्री यहां प्रस्तुत है। इस शृंखला को आप यहां पढ़ सकते हैं। … Continue readingआचार्य रामचंद्र तिवारी : सारस्वतबोध के प्रतिमान – डॉ. अमरनाथ

हिन्दी आलोचना में विसंगतियाँ – डॉ. अमरनाथ

हिन्दी आलोचना का इतिहास विसंगतियों से भरा हुआ है और हमारा हिन्दी समाज अब उसके दुष्परिणाम भी झेल रहा है किन्तु हमारे वरिष्ठ आलोचकों की नजर भी उन विसंगतियों की ओर नहीं पड़ रही है. हम उनमें से कुछ विसंगतियों की ओर पाठको का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश करेंगे. … Continue readingहिन्दी आलोचना में विसंगतियाँ – डॉ. अमरनाथ

जॉर्ज लूकाच – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 279 साहित्यिक मसलों की मार्क्सवादी दृष्किोण से व्याख्या करने वाले समर्थ आलोचकों में लूकाच का नाम आता है। किन्तु उनकी कुछ मुख्य स्थापनाओं के बारे में मार्क्सवादी चिन्तकों

Continue readingजॉर्ज लूकाच – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल