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मुनाजात-ए-बेवा – अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती

Post Views: 166 मुनाजात-ए-बेवा (1884) ए सब से अव्वल1 और आखिर2 जहाँ-तहाँ हाजि़र और नाजि़र3 ए सब दानाओं से दाना4 सारे तवानाओं से तवाना5 ए बाला हर बाला6 तर से…

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बेटियों की निस्बत – अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती  

Post Views: 60 ज़ाहलियत के ज़माने में ये थी रस्मे अरब के किसी घर में अगर होती थी पैदा दुख़्तर1 संग दिल2 बाप उसे गोद से लेकर माँ की गाड़…

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रात भर लोग अंधेरे की बलि चढ़ते हैं – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 48 ओमसिंह अशफाक  आबिद आलमी (4-6-1933—9-2-1994) पिछले दिनों अम्बाला में तरक्की पसंद तहरीक में ‘फिकोएहसास के शायर’ जनाब आबिद आलमी हमसे हमेशा के लिए बिछड़ गए। उनका मूल…

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ऐसे अपनी दुआ क़ुबूल हुई-बलबीर सिंह राठी

Post Views: 42  ग़ज़ल ऐसे अपनी दुआ क़ुबूल हुई, राह तक मिल सकी न मंजि़ल की, कारवाँ से बिछडऩे वालों को, उन की मंजि़ल कभी नहीं मिलती। खो गई नफ़रतों…

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ये अलग बात बच गई कश्ती -बलबीर सिंह राठी

Post Views: 46  ग़ज़ल   ये अलग बात बच गई कश्ती, वरना साजि़श भंवर ने ख़ूब रची। कह गई कुछ वो बोलती आँखें, चौंक उट्ठी किसी की ख़ामोशी। हम तो…

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पहले कोई ज़ुबाँ तलाश करूँ – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 40  ग़ज़ल पहले कोई ज़ुबाँ तलाश करूँ, फिर नई शोखियाँ1 तलाश करूँ। अपने ख्वाबों की वुसअतों2 के लिए, मैं नये आसमां तलाश करूँ। मंजि़लों की तलाश में निकलूँ,…

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कौन बस्ती में मोजिज़ा गर है -बलबीर सिंह राठी

Post Views: 32  ग़ज़ल कौन बस्ती में मोजिज़ा गर है, हौंसला किस में मुझ से बढ़ कर है। चैन    से   बैठने   नहीं   देता, मुझ में बिफरा हुआ समन्दर है।…

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कौन कहता है कि तुझको हर खुशी मिल जाएगी- बलबीर सिंह राठी

Post Views: 25  ग़ज़ल कौन कहता है कि तुझको हर खुशी मिल जाएगी, हां मगर इस राह में मंजि़ल नई मिल जाएगी। अपनी राहों में अंधेरा तो यक़ीनन है मगर,…

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जिनकी नज़रों में थे रास्ते और भी- बलबीर सिंह राठी

Post Views: 28  ग़ज़ल जिनकी नज़रों में थे रास्ते और भी, जाने क्यों वो भटकते गये और भी। मैं ही वाक़िफ़ था राहों के हर मोड़ से, मैं जिधर भी…