placeholder

विभाजन की यादें – अंशु मालवीय की गोपाल राम अरोड़ा से बातचीत

Post Views: 70 श्री गोपाल राम अरोड़ा, हिसार, हरियाणा में रहते है। सरकारी नौकरी से रिटायर हुए कई बरस बीत गए। पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। हिसार में…

placeholder

हरियाणाः तब और अब – राजेंद्र सिंह ‘सोमेश’ 

Post Views: 23 हरियाणा का वर्तमान स्वरूप एक नवम्बर सन् उन्नीस सौ छियासठ को मिला। तब से लेकर अनेक उतार-चढ़ावों को पार करते इस प्रांत ने कई पड़ाव पार किए…

placeholder

हरियाणा में स्कूली शिक्षा की बिगड़ती स्थिति – नरेश कुमार

Post Views: 19 हरियाणा में स्कूली शिक्षा की तस्वीर आए दिन लगातार धुंधली होती जा रही है। हाल ही में राज्य सरकार ने प्रदेश में 25 हजार नए शिक्षकों की…

कब्रिस्तान की बेरियां -कुलबीर सिंह मलिक

Post Views: 68 कहानी मुल्क के बंटवारे के साथ हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच जो खून की होली खेली गई उसके कहर से उत्तर भारत का, विशेषत: पंजाब का, कोई…

placeholder

राजेन्द्र बड़गूजर – हरियाणा का लोक साहित्य : पचास साल

Post Views: 90 लोकधारा हरियाणा का लोक साहित्य एवं सांग परम्परा इस मायने में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हैं कि यह मनोरंजन एवं  सामाजिक जीवन  की उठा-पटक एवं संघर्ष का दिग्दर्शन कराते…

placeholder

हरियाणा का हाल

Post Views: 17 अरुण कुमार कैहरबा हरि के हरियाले प्रदेश हरियाणा का हाल सुणो, खरी-खरी कड़वी-सी बात और चुभते हुए सवाल सुणो। दूध-दही के खाणे वाला मीठा-मीठा गीत कहां सै,…

placeholder

आने वाले सालों में क्या – सुरेन्द्र पाल सिंह

Post Views: 21  गणतंत्र दिवस पर दिखाई जाने वाली झांकियों और लोक सम्पर्क विभाग द्वारा प्रस्तुत हरियाणा की स्टीरियो टाईप छवि से हटकर दैनंदिन जीवन की सकारात्मक या नकारात्मक बारीकियों…

placeholder

सुधीर शर्मा – मेरा नौकर वर ढुंढवाइए मेरी मां

Post Views: 86 हरियाणवी नृत्य गीत मेरा नौकर वर ढुंढवाइए मेरी मां विवाह योग्य होने पर परम्परागत समाज में अपना पति पसंद करने वाली युवतियों की भूमिका नहीं होती। पर…

placeholder

महिला की पूर्व निर्धारित भूमिका में बदलाव -सुमित सौरभ 

Post Views: 101 सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को…

placeholder

कहा था न -हर भजन सिंह रेणु

Post Views: 97 कविता मैंने तुम्हें कहा था न मत कर कबीर-कबीर और अब शहर के बाहर खड़ा रह अकेला। अपने फुंके घर का देख तमाशा हक सच की आवाज…