Tag: हरियाणवी अनुवाद

ऐकला चाल – रवीन्द्रनाथ टैगोर

रवीन्द्रनाथ टैगोर की एकला चलो रे कविता का डा. सुभाष चंद्र द्वारा हरियाणवी अनुवाद … Continue readingऐकला चाल – रवीन्द्रनाथ टैगोर

कसूरवार – अंतोन चेखव

अंतोन चेखव की मैलइफेक्टर का हरयाणवी अनुवाद। जिसमें 19 वीं सदी के रूसी किसान के भोलेपन एवं उसकी दुर्दशा का वर्णन के साथ असवेंदनशील न्याय व्यवस्था के क्रियाकलापों पर करारा व्यंग्य है। – सं. … Continue readingकसूरवार – अंतोन चेखव

लेणे के देणे – चिनवा अचेबे

चिनवा अचेबे की रचनाओं ने विश्व के साहित्य के लेखन, अध्ययन व अध्यापन को प्रभावित किया है। प्रस्तुत कहानी अचेबे की कलम से निकली एक इग्बो लोक कथा का हरियाणवी अनुवाद है जिसको ‘थिंग्स फॉल अपार्ट’ से लिया गया है। इसमें चालाक कछुए और भोले-भाले पक्षियों के माध्यम से चालाक लोग वाक्चातुर्य से किस तरह से सीधे-सादे लोगों को ठगते व शोषण करते हैं इसको उदघाटित करने की कोशिश की और लोग किस तरह से प्रतिरोध प्रकट करते हैं – सं. … Continue readingलेणे के देणे – चिनवा अचेबे

किरेळिया – अंटोन चेखव

विश्व प्रसिद्ध रुसी कहानीकार अंटोन चेखव ने अपनी प्रसिद्ध कहानी गिरगिट में शासन-प्रशासन  में फैला भ्रष्टाचार, जनता के प्रति बेरुखी और अफसरशाही की चापलूसी को उकेरा है। भारतीय संदर्भों में भी प्रासंगिक है। प्रस्तुत है इस कहानी का राजेंद्र सिंह द्वारा हरियाणवी अनुवाद। सं.
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