placeholder

हरिजन गाथा – नागार्जुन

Post Views: 79 कविता (1) ऐसा तो कभी नहीं हुआ था !महसूस करने लगीं वेएक अनोखी बेचैनीएक अपूर्व आकुलताउनकी गर्भकुक्षियों के अन्दरबार-बार उठने लगी टीसेंलगाने लगे दौड़ उनके भ्रूणअंदर ही अंदरऐसा…