Tag: सुभाष चंद्र

जन संवाद की कसौटी हैं संवैधानिक मूल्य: डॉ. सुभाष चन्द्र

वक्तृत्व कौशल विकास पर आधारित कार्यशाला आयोजित घरौंडा के गांव बरसत में स्वतंत्रता समता बंधुता मिशन भारत के तत्वावधान में नेतृत्व विकास एवं वक्तृत्व कौशल विकास पर आधारित की कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देस हरियाणा, सृजन कला मंच, हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति, डॉ. भीमराव अंबेडकर विचार मंच, गढ़ी भरल, युवा प्रयास मंच गढ़ी भरल, शहीद भगत सिंह पुस्तकालय गुढ़ा, शहद भगत सिंह पुस्तकालय चौरा, महषि वाल्मीकि वेल्फेयर सोसायटी मुबारकाबाद के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। … Continue readingजन संवाद की कसौटी हैं संवैधानिक मूल्य: डॉ. सुभाष चन्द्र

नामवर सिंह : हिंदी आलोचना के ‘मेहतर’- प्रो. सुभाष चन्द्र

नामवर सिंह ने जब हिन्दी समीक्षा में पदार्पण किया तो वह समय न केवल हिन्दी रचना व आलोचना के लिए महत्त्वपूर्ण था, बल्कि दर्शन व साहित्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया में गर्मागर्म बहस छिड़ी हुई थी। नामवर सिंह को उस परम्परा में भी संघर्ष करना पड़ा, जिसको वे आगे बढ़ाना चाहते थे और इसके विरोधियों से तो टक्कर लेने के लिए वे मैदान में उतरे ही थे। (लेख से ) … Continue readingनामवर सिंह : हिंदी आलोचना के ‘मेहतर’- प्रो. सुभाष चन्द्र

मानवीय संवेदना व जिजीविषा हमेशा ज़िंदा रहती है – सुभाष चंद्र

पुरानी होने से ही न तो सभी वस्तुएँ अच्छी होती हैं और न नयी होने से बुरी तथा हेय।विवेकशील व्यक्ति अपनी बुद्धि से परीक्षा करके श्रेष्ठकर वस्तु को अंगीकार कर लेते हैं और मूर्ख लोग दूसरों द्वारा बताने पर ग्राह्य अथवा अग्राह्य का निर्णय करते हैं। … Continue readingमानवीय संवेदना व जिजीविषा हमेशा ज़िंदा रहती है – सुभाष चंद्र

शिक्षा जिंदगी का गेम चेंजर – सुभाष चंद्र

सावित्रीबाई फुले जयंती 2 जनवरी 2020 को गांव बरसत जिला करनाल में सत्यशोधक फाउंडेशन व सृजन कला मंच, बरसत द्वारा आयोजित कार्यक्रम … Continue readingशिक्षा जिंदगी का गेम चेंजर – सुभाष चंद्र

महात्मा गांधीः धर्म और साम्प्रदायिकता – डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 1,034 साम्प्रदायिकता आधुनिक युग की परिघटना है। अंग्रेजों ने भारत की शासन सत्ता संभाली तो राजनीति और आर्थिक व्यवस्था प्रतिस्पर्धात्मक हो गई। अंग्रेजी शासन में हिन्दुओं व मुसलमानों

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जनपक्षीय राजनीति का मार्ग प्रशस्त करें

Post Views: 391 सेवा देश दी जिंदड़िए बड़ी ओखी,गल्लां करणियां ढेर सुखल्लियां ने।जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइयाउन्नां लख मुसीबतां झल्लियां ने।        – करतार सिंह सराभा यह साल

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वैचारिक बहस को जन्म दे रही है देस हरियाणा’

Post Views: 367 विकास होग्या बहुत खुसी, गामां की तस्वीर बदलगीभाईचारा भी टूट्या सै, इब माणस की तासीर बदलगी -रामेश्वर गुप्ता पिछले दस-बारह सालों से ‘हरियाणा नं. 1’ की छवि

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सावित्रीबाई फुले : जीवन जिस पर अमल किया जाना चाहिए

Post Views: 477 7 जनवरी को दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM), दिल्ली ने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले की 187वें जन्मदिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया  

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कहानियों के बीच बोलता : तारा पांचाल

Post Views: 378 डा. सुभाष चंद्र हरियाणा के छोटे से पिछड़े कस्बे नरवाना (बकौल तारा पांचाल नरवाना कंट्री)में जन्मे तारा पांचाल एक कहानीकार के तौर पर पूरे देश में प्रतिष्ठित

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मंहगाई डायन खाए जात है -डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 379 मंहगाई की प्राकृतिक आपदा या संकट नहीं है, बल्कि इसके पीछे निहित स्वार्थ हैं। वे स्वार्थ हैं अधिक से अधिक लाभ कमाने के। पूंजीवादी व्यवस्था लाभ पर

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