Tag: सिरसा

क्या कर लिया हमने ?

Post Views: 270 सुभाष चन्द्र सदियों से हमें गांवों में मंदिरों में, स्कूलों में कहीं घुसने नही दिया गया क्या कर लिया हमने ? शम्बुक की हत्या की गयी एकलव्य

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तुर्कों की निरंकुशता के विरुद्ध-संघर्ष – बुद्ध प्रकाश

Post Views: 575 बुद्ध प्रकाश 24 जून, 1206 को कुतबुद्दीन ऐबक दिल्ली के राजसिंहासन पर बैठा और उत्तरी भारत के तुर्क राज्य की प्रतिष्ठापना की। मध्यवर्ती एशिया के धर्मांध तथा

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हरियाणा का इतिहास-अल्पतंत्रीय वर्ग का उत्थान – बुद्ध प्रकाश

Post Views: 295 बुद्ध प्रकाश यौधेयों ने, जिनके विषय में पहले उल्लेख किया जा चुका है, ई, पू.  की प्रथम तथा द्वितीय शताब्दी के उत्तरार्ध में अपनी मुद्रा चला कर

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ओ. पी. सुथार – वर्तमान कृषि संकट और किसान आन्दोलन

Post Views: 535 गतिविधियां सिरसा में अखिल भारतीय किसान सभा के 34 वे राष्ट्रीय सम्मेलन तैयारी के लिए स्वागत समिति के गठन के अवसर पर ‘युवक साहित्य सदन’ के सभागार

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तुम कबीर न बनना- हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 637     कविता जब मेरे दोस्त मुझे कबीर बना रहे थे मैं प्यादों की ताकत से ऊंटों की शह मात बचा रहा था घोड़े दौड़ा रहा था

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प्रतिकर्म -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 490 कविता मुझे मत कहना गर मैं कविता करते-करते शब्दों की जुगाली करने लगूं और सभ्य भाषा बोलते-बोलते बौराये शराबी की तरह चिल्लाने लगूं बेइखलाकी पर उतर जाऊं

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कहा था न -हर भजन सिंह रेणु

Post Views: 768 कविता मैंने तुम्हें कहा था न मत कर कबीर-कबीर और अब शहर के बाहर खड़ा रह अकेला। अपने फुंके घर का देख तमाशा हक सच की आवाज

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वैश्वीकरण -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 555 कविता मैं खौफनाक चाबुकधारी नहीं कांप जाओगे जिससे। मैं पुष्प अणु हूं तुम्हारी सांसों तुम्हारे लहु में समा जाऊंगा मस्तिष्क पर बैठ करके सम्मोहित कर दूंगा मदहोश।

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सीढ़ी -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 534 कविता मनुष्य जीवनभर तलाशता है सीढ़ी ताकि छू सके कोई ऊंची चोटी एक ऊंचाई के बाद तलाशता है दूसरी सीढ़ी औ’ हर ऊंचाई के बाद नकारता है

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बनवास -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 518 कविता वनों की ओर जाना ही नहीं होता बनवास जब भी अकेलापन करता है उदास ख्यालों के कुरंग नाचते हैं चुप्पी देती है ताल उल्लू चीखते हैं

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