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हिन्दी जाति का संगीत और सिनेमा – डॉ. अमरनाथ

गुलशन बावरा, कैफी आजमी, अली सरदार जाफरी, मजरूह सुल्तानपुरी, कमाल अमरोही, शकील बदायूंनी, साहिर लुधियानवी, गुलजार, जावेद अख्तर और निदा फाजली तक अधिंकांश बड़े गीतकार उर्दू के हैं किन्तु न तो उनके गीतों को ‘उर्दू गीत’ कहा जाता है और न तो उनकी फिल्मों को हम ‘उर्दू फिल्में’ कहते हैं .

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तब इरफान बोले थे – तनहाई से घबराता हूं और पैसों से ऊब जाता हूं

Post Views: 22 बॉलिवुड के बेहतरीन ऐक्टर इरफान भले ही इस दुनिया से चले गए हों मगर फैन्स के दिलों में वह हमेशा जिंदा रहेंगे। इरफान को गुजरे पूरा एक…

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अविस्मरणीय विभूति : सत्यजित राय-धीरेंद्र कुमार राय

राय के साँसों की रफ्तार धीमी हो चुकी थी। पैर थम से गए थे। शरीर पूरी तरह थक चुका था। उनकी आँखें अब पूरी पलक फैलाकर दुनिया को देखने में असमर्थ थीं लेकिन उनकी सोच अभी भी समाज की नब्ज को मजबूती से थामें हुई थी। हौसले बुलंद थे। शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद खुद के प्रति उनका विश्वास कुछ ज्यादा ही था। जीवन के अंतिम क्षणों में वे फिल्म ‘आगंतुक’ के माध्यम से समाज के साथ कदमताल करते हुए सभ्यता विमर्श कर रहे थे। (लेख से)

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जीवन के विविध रंगों जीवन-दृष्टि देता रंगमंच – अरुण कुमार कैहरबा

थियेटर या रंगमंच जीवन के विविध रंगों को मंच पर प्रस्तुत करने की जीवंत विधा है। रंगमंच सही गलत के भेद को बारीकी से चित्रित करता है। रंगमंच सवाल खड़े करता है। रंगमंच समाज का आईना ही नहीं है, बल्कि परिवर्तन का सशक्त औजार भी है।

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मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि – सहीराम

Post Views: 632 सहीराम  मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि क्या है? जैसे हरियाणवी पुरुष जिसे आमतौर पर हाळी-पाळी कहा जाता है, की छवि खेतों में खटनेवाले एक मेहनतकश किसान…

अलीगढ़ : समलैंगिकता पर विमर्श -विकास साल्याण

Post Views: 502 समलैंगिकता को अलग-अलग दृष्टि से देखा जाता है कुछ समलैंगिकता को मानसिक बीमारी मानते हैं। कुछ इसे परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आदत मानते हैं तो कुछ एक…

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कुछ मुंबइया फिल्में और हरियाणवी जनजीवन का यथार्थ – सहीराम

Post Views: 403 अभी तक यही माना जाता रहा है कि हरियाणवी जन जीवन खेती किसानी का बड़ा ही सादा और सरल सा जन जीवन है। इसमें न कोई छल-कपट…

दायरा’ संकीर्ण सामाजिक दायरों पर प्रहार -विकास साल्याण

Post Views: 362 सिनेमा-चर्चा रोहतक के फि़ल्म एवम् टेलीविजन संस्थान के छात्रों द्वारा बनाई गई ‘दायरा’ फि़ल्म हरियाणवी सिनेमा को नई दिशा की ओर ले जा रही है। इस फिल्म…

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पचास साल का सफर हरियाणवी सिनेमा -सत्यवीर नाहडिया

Post Views: 1,739 सिनेमा हरियाणा प्रदेश के स्वर्ण जयंती वर्ष के पड़ाव पर यदि हरियाणवी सिनेमा की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन करें तो निराशा ही हाथ लगती है। सन् 1984…