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हिरोशिमा – अज्ञेय

Post Views: 27 एक दिन सहसासूरज निकलाअरे क्षितिज पर नहीं,नगर के चौक :धूप बरसी पर अन्तरिक्ष से नहीं,फटी मिट्टी से। छायाएं मानव-जन कीदिशाहीन सब ओर पड़ीं – वह सूरजनहीं उगा…

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हमारा देश- अज्ञेय

Post Views: 9 इन्हीं तृण-फूस छप्पर से ढके ढुलमुल गवारू झोंपड़ों में ही हमारा देश बसता है। इन्हीं के ढोल-मादल बाँसुरी के . उमगते सुर में हमारी साधना का रस…

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यह मनुज- रामधारी सिंह दिनकर

Post Views: 19 यह मनुज, ब्रह्माण्ड का सबसे सुरम्य प्रकाश, कुछ छिपा सकते न जिससे भूमि या आकाश । यह मनुज, जिसकी शिखा उद्दाम । कर रहे जिसको चराचर भक्तियुक्त…

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कैदी और कोकिला – माखन लाल चतुर्वेदी

Post Views: 12 तुम रवि-किरणों से खेल, जगत को रोज़ जगाने वाली, कोकिल ! बोलो तो! क्यों अर्धरात्रि में विश्व जमाने आई हो ? मतवाली, कोकिल ! बोलो तो! दूबों…

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सुख-दुख- सुमित्रानंदन पंत

Post Views: 24 मैं नहीं चाहता चिर-सुख, चाहता नहीं अविरत दुख, सुख-दुख की आँख-मिचौनी खोले जीवन अपना मुख। सुख-दुख के मधुर मिलन से यह जीवन हो परिपूरन, फिर घन में…

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जागो फिर एक बार- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

Post Views: 10 जागो फिर एक बार! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार! . आँखें अलियों-सी किस मधु की…

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बादल राग- सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

Post Views: 6 तिरती है समीर-सागर पर अस्थिर सुख पर दुख की छाया जग के दग्ध हृदय पर निर्दय विप्लव की प्लावित माया यह तेरी रण-तरी भरी आकांक्षाओं से घन,…

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विधवा – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

Post Views: 7 विधवा वह इष्टदेव के मन्दिर की पूजा–सी वह दीप-शिखा-सी शान्त, भाव में लीन, वह क्रूर-काल-ताण्डव की स्मृति-रेखा-सी वह टूटे तरु की छुटी लता-सी दीन दलित भारत की…