Tag: साहित्य विमर्श

परिवार और महिला की आजादी- अनुवाद – सोनिया

Post Views: 41 सवालों की मर्यादा से बाहर मत जाओ गार्गी वरना सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा ऋषि याज्ञवल्क्या ने जनक राजा के दरबार में शास्त्रार्थ के दौरान

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कबीर और बाबा नागार्जुन के बहाने – योगेश

Post Views: 43 योगेश शर्मा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के हिंदी विभाग में शोधार्थी हैं और देस हरियाणा पत्रिका टीम का हिस्सा हैं। नई सदी के पहले दो दशकों की हिंदी

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संत रैदास को याद करते हुए – अरुण कैहरबा

Post Views: 41 उपजे एक बूंद तै का बामन का सूद। मूरख जन ना जानई सबमैं राम मौजूद।। रविदास जन्म के कारनै होत न कोऊ नीच। नर कूं नीच करि

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कोई दूसरा लोग – सुरेन्द्र पाल सिंह

Post Views: 78 सुरेन्द्र पाल सिंह हरियाणा की लोक–संस्कृति को पैनी इतिहास बोध भरी दृष्टि से देखते रहे हैं लेकिन इधर अब उनकी दिलचस्पी कविताओं के अनुवाद और कहानी लेखन

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पिता-पुत्री के रिश्ते को चित्रित करता उपन्यास “रूदादे-सफ़र” –  डॉ. सुधा ओम ढींगरा

Post Views: 11 पंकज सुबीर एक ग़ज़लकार, संपादक, कथाकार और उपन्यासकार हैं। कई कहानियों के साथ-साथ पहले तीन उपन्यास ‘ये वो सहर तो नहीं’, ‘अकाल में उत्सव’ और ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़

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सूत की डोरी – योगेश

Post Views: 40 योगेश शर्मा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के हिंदी विभाग में शोधार्थी हैं। आधुनिक हिंदी कविता को भाषा बोध और दर्शन के परिप्रेक्ष्य में देखने समझने में रूचि है।

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श्री करतारपुर साहब (पाकिस्तान) की यात्रा – सुरेंद्र पाल सिंह

Post Views: 43 जन्म – 12 नवंबर 1960 शिक्षा – स्नातक – कृषि विज्ञान स्नातकोतर – समाजशास्त्र सेवा – स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत लेखन – सम सामयिक मुद्दों

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राम-रहीम हथकरघा – सुशील स्वतंत्र

Post Views: 35 दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता से साप्ताहिक अखबार का संपादक और फिर लेखक बनें सुशील विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। 1978

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हिंदी कथा साहित्य के आईने में विकलांग विमर्श- डॉ. सुनील कुमार

Post Views: 198 साहित्य व समाजशास्स्त्री ,दलित और जनजाति विमर्श के बाद 21वीं सदी के प्रथम दशक की दस्तक के रूप में विकलांग विमर्श स्थापित हो रहा है । वैश्विक

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Savi Savarkar, ‘Untouchables’

पाँच कविताएँ – विनोद कुमार

Post Views: 225 विनोद कुमार ने हाल ही में हिंदी साहित्य में अपना एम.ए. पूरा किया है। दलित साहित्य के पठन – लेखन में विशेष रूचि है। जाति व्यवस्था के

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