Tag: साहित्य विमर्श

शिवमूर्ति – प्रतापनारायण मिश्र

Post Views: 11 हमारे ग्राम-देव भगवान् भूतनाथ से अकथ्य अप्रतर्क्स एवं अचिंत्य हैं। तो भी उनके भक्तजन अपनी रुचि के अनुसार उनका रूप, गुण, स्वभाव कल्पित कर लेते हैं। उनकी

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साबिर की कविताओं में बुल्लेशाह-फरीद की गूंज सुनाई देती है-अरुण कुमार कैहरबा

Post Views: 32 पश्चिमी पंजाब के प्रसिद्ध शायर व कवि साबिर अली साबिर भारत और पाकिस्तान के दोनों पंजाब में समान रूप से जाना-माना नाम है। उनकी रचनाएं बहुत ही

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साबिर अली साबिर की कविताएँ, अनुवाद – सुरेन्द्र पाल सिंह

Post Views: 45 हालाँकि साबिर अली साबिर पकिस्तान के रहने वाले हैं, लेकिन साबिर की लोकप्रियता अब किसी देश की काल्पनिक सीमाओं की मोहताज नहीं रही। व्यापक मानवीय सरोकारों के

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हरयाणवी गज़लें – मंगत राम शास्त्री

Post Views: 140 लम्बे अरसे से मंगत राम शास्त्री हरियाणवी ग़ज़ल लिख रहे हैं। इनकी रचनाओं में पोलिटिकल फंडामेंटलिज्म के प्रति सचेत विरोध है। इसके अलावा शास्त्री की गज़लें अपने

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हे कविता के तीर्थ – सुरजीत पातर

Post Views: 48 अभी 12 मार्च को जब संजीव जी को साहित्य अकादमी दिया गया तो उस सभागार में पातर जी बहुत बातें की थी, कविताएँ भी सुनीं और खुशकिस्मती

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होली – अमित मनोज

Post Views: 34 हाल ही में हरियाणा के देहात में जबरदस्त बदलाव हुए हैं। इन बदलावों के चलते परम्परागत त्यौहारों के प्रति भी एक विशेष किस्म की उदासीनता को महसूस

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अक़्लमंद हो तो क्या लिखो ? – हिमांशु कुमार दंतेवाड़ा

Post Views: 41 ‘रूप, रंग, गंध लिखो मन की उड़ान हो गई जो स्वच्छंद लिखो तितली लिखो, फूल लिखोरेशम लिखो, प्रेम लिखोजो भी लिखोप्रशंसा, पैसा और सम्मान के ज़रूरतमंद लिखोचमक

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ग़ज़लें – मनजीत भोला

Post Views: 37 मनजीत भोला की ग़ज़ल आम आदमी की ग़ज़ल है, आम आदमी से भी बढ़कर वह हाशिए पर जबरन धकेल दिए गए लोगों की ग़ज़ल है। भोला को

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कुंठित व्यक्ति क्रांति नहीं ला सकते : महादेवी वर्मा

Post Views: 36 किताबों में देखी तसवीर से रत्तीभर भी अंतर नहीं। वैसा ही सौम्य चेहरा, 80 वर्ष की हो जाने के कारण चेहरे पर झुर्रियां, उनमें झलकती एक युग

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भगत सिंह की कुरबानी पर आल्हा गाने निकला हूँ – शैलेन्द्र सिंह

Post Views: 80 भगत सिंह की कुरबानी पर आल्हा गाने निकला हूँ,आज़ादी के दर्पण की मैं धूल हटाने निकला हूँ।शत-शत कोटिक नमन लेखनी भगत सिंह की करनी को,ऐसा बालक जनने

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