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मनुष्य की नई प्रजाति – सहीराम

सहीराम  हम मनुष्य की नई प्रजाति हैं। हमारी खासियत यह है कि हम अपने बच्चों को खा जाते हैं। हम सांप नहीं हैं, हम कोई ऐसे बनैले जीव भी नहीं…

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एक गांव दो चेहरे – सहीराम

कोई दो महीने पहले यह गांव पहली बार तब चर्चा में आया था,जब बीजिंग ओलंपिक में इस गांव के बेटे विजेंद्र ने मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीत कर अपने देश…

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हम तालिबान बनना चाहते हैं – सहीराम

सहीराम  खाप पंचायती वैसे तो तालिबान बन ही चुके थे, सब उन्हें मान भी चुके थे। लेकिन पक्के और पूरे तालिबान बनने की उनकी इच्छा ने इतना जोर मारा कि…

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मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि – सहीराम

सहीराम  मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि क्या है? जैसे हरियाणवी पुरुष जिसे आमतौर पर हाळी-पाळी कहा जाता है, की छवि खेतों में खटनेवाले एक मेहनतकश किसान की छवि है…

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भाईचारे की अवधारणा और खाप पंचायतें -सहीराम

टूटते सामाजिक मूल्यों और संबंधों के इस दौर में भाईचारा एक बहुत ही पवित्र सी अवधारणा के रूप में सामने आता है। भाईचारे की यह अवधारणा वैसे तो पारिवारिक संबंधों…

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1857, किस्सा सदरूद्दीन मेवाती का – सहीराम 

नौटंकी पात्र : नट तथा नटी। दो देहाती (बार-बार उन्हीं को दोहराया जा सकता है),एक ढिढ़ोरची (दो देहातियों में एक हो सकता है या नट भी हो सकता है) और…

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कुछ मुंबइया फिल्में और हरियाणवी जनजीवन का यथार्थ – सहीराम

                सिनेमा अभी तक यही माना जाता रहा है कि हरियाणवी जन जीवन खेती किसानी का बड़ा ही सादा और सरल सा जन…