Tag: सर छोटू राम

सरकार और आजादी – सर छोटू राम

Post Views: 441 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह हार्टकोर्ट बटलर का मानना था कि तमाम सरकारें नागरिक आजादी पर हावी होती हैं। 1923-24 में, बकौल छोटू राम, ब्रिटिश सरकार का

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भारतीय नारियां: चौधरी छोटू राम

Post Views: 404 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह बटलर द्वारा पर्दा-प्रथा, शिक्षा एवं सामाजिक जीवन में महिलाओं से भेदभाव पर टिप्पणियों के जवाब में चौधरी छोटू राम ने एक ओर

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अंग्रेजी राज की न्याय-व्यवस्था: एक सटीक टिप्पणी -चौधरी छोटू राम

Post Views: 350 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह चौधरी छोटू राम खुद वकील होने के नाते ब्रिटिश न्याय प्रणाली को भली-भांति समझते थे। बटलर ने मित्रता के नाते इस विषय

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भारत में संकट पर – चौधरी छोटू राम

Post Views: 313 अनुवाद-हरि सिंह हार्टकोर्ट बटलर 1914-18 में रोहतक के उपायुक्त रहे। उस दौरान चौधरी छोटूराम एक प्रमुख वकील, जाट गजट उर्दू साप्ताहिक के सम्पादक एवं जिला कांग्रेस कमेटी

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पंजाब के किसान का भविष्य – सर छोटू राम

Post Views: 460 अनुवाद-हरि सिंह संसार परिवर्तनशील है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इस समय तो दुनिया में परिवर्तन का तूफान बड़ी तेजी से आया हुआ है। भारत भी

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खूए शेर या खूए मेष (सिंह-वृत्ति या भेड़-वृत्ति) – चौधरी छोटू राम

Post Views: 450 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह जब युद्ध के नगारे पर चोट पड़ती है और किसान का सिपाही बेटा सजकर शत्रु के मुकाबले के लिए प्रस्थान करता है

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खूए हरकत या खूए सकून (रजोगुण  या तमोगुण) – चौधरी छोटू राम

Post Views: 560 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह ऐ जमींदार! तेरी खातिर मैंने सारी दुनिया से जंग मोल ले रखी है। तेरे लिए ही जमाने भर को नाराज कर लिया

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किसान को नई मनोवृत्ति की आवश्यकता – चौधरी छोटू राम

Post Views: 494 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह पाठक, शायद शिकायत करेंगे कि मैं एक ही विषय की ओर बार-बार और रोज-रोज झुकता हूं। जमींदार की मुसीबत, जमींदार की टूटी-फूटी

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नया उपदेश – चौधरी छोटू राम

Post Views: 406 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह इन्सान आदत का गुलाम है और अपने समय में प्रचलित विचारों का पुजारी है। कुछ जमाने की मुसीबतों से, कुछ आसपास के

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किसान की कराहट – चौधरी छोटू राम

Post Views: 587 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह ऐ मालिक दो जहान! सब्बुआलमीन! मेरे खलीक। मेरे मौला! हे परमात्मा परमेश्वर, सृष्टि के सृजनहार, सर्वशक्तिमान! हे वाहेगुरु! मैंने वह कौन-सा पाप-गुनाह

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