Tag Archives: सत्यवीर ‘नाहडिय़ा’

लुटी ज्यब खेत्ती बाड़ी

सत्यवीर ‘नाहडिय़ा’ रागनी 1 माट्टी म्हं माट्टी हुवै, जमींदार हालात। करजा ले निपटांवता, ब्याह्-छूछक अर भात। ब्याह्-छूछक अर भात, रात-दिन घणा कमावै। मांह् -पौह् की बी रात, खेत म्हं खड़ा बितावै। खाद-बीज का मोल, सदा हे ठावै टाट्टी। अनदात्ता बेहाल, पिटै चोगरदे माट्टी।। 2 खरचा लग लिकड़ै नहीं, खेत्ती का यो हाल। करजा बढ़ता हे रहै, चूंट बगावै खाल। चूंट

Read more