Tag: सखि

दोनों ओर प्रेम पलता है – मैथिलीशरण गुप्त

Post Views: 178 दोनों ओर प्रेम पलता है। सखि, पतंग भी जलता है हां! दीपक भी जलता है ! सीस हिलाकर दीपक कहता “बन्धु, वृथा ही तू क्यों दहता ?”

Continue readingदोनों ओर प्रेम पलता है – मैथिलीशरण गुप्त