Tag: शिक्षा-स्वास्थ्य

विद्यार्थी और राजनीति – भगत सिंह

Post Views: 85 इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान(विद्यार्थी) राजनीतिक या पोलिटिकल कामों में हिस्सा न लें। पंजाब सरकार की राय बिल्कुल

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भारत की कोरोना नीति के चंद नुक्सानदेह पहलू: राजेन्द्र चौधरी

कोरोना से हमारा वास्ता अभी लम्बे समय तक चलने वाला है. काफिला पर छपे पिछले आलेखों में में हम ने इस के सही और गलत, दोनों तरह के सबकों की चर्चा की थी पर भारत की करोना नीति की समीक्षा नहीं की थी. आपदा और युद्ध काल में एक कहा-अनकहा दबाव रहता है कि सरकार को पूरा समर्थन दिया जाए और उस की आलोचना न की जाय पर कोरोना के मुकाबले के लिए भारत में अपनाई गई रणनीति की समीक्षा ज़रूरी है; यह समीक्षा लम्बे समय तक चलने वाली इस आपदा में रणनीति में सुधार का मौका दे सकती है. कोरोना से कैसे निपटना चाहिए इस में निश्चित तौर पर सब से बड़ी भूमिका तो कोरोना वायरस की प्रकृति की है- ये गर्मी में मरेगा या सर्दी में या नहीं ही मरेगा; बूढों को ज्यादा मारेगा या बच्चों को, इन तथ्यों का इस से निपटने की रणनीति तय करने में सब से बड़ी भूमिका है. इस लिए भारत में कोरोना की लड़ाई के मूल्यांकन से पहले हमें वायरस की प्रकृति के बारे में उपलब्ध जानकारी को रेखांकित करना होगा. … Continue readingभारत की कोरोना नीति के चंद नुक्सानदेह पहलू: राजेन्द्र चौधरी

प्रधानमंत्री जी से एक शिक्षक की हैसियत से विनती-अमरनाथ

( लेखक कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष हैं.) … Continue readingप्रधानमंत्री जी से एक शिक्षक की हैसियत से विनती-अमरनाथ

‘चॉक व चुनौतियों को मिलाकर विद्यार्थियों का जीवन बदलता शिक्षक’- अरुण कुमार कैहरबा

लेखक हिंदी विषय के अध्यापक तथा देसहरियाणा पत्रिका के सह-सम्पादक हैं … Continue reading‘चॉक व चुनौतियों को मिलाकर विद्यार्थियों का जीवन बदलता शिक्षक’- अरुण कुमार कैहरबा

वैक्सीन काम कैसे करती है? – नवमीत नव

आखिर कोई वैक्सीन काम कैसे करती है? इस बारे में जानकारी दे रहें हैं नवमीत नव.
नवमीत पानीपत, हरियाणा के एन सी मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं. … Continue readingवैक्सीन काम कैसे करती है? – नवमीत नव

शिक्षा, शिक्षक और बदलावः एक चुनौती, एक अवसर – मुलख सिंह 

शिक्षा का मतलब यह नहीं है कि दिमाग में कई ऐसी सूचनाएं एकत्रित कर ली जाएं जिसका जीवन में कोई इस्तेमाल ही नहीं हो। हमारी शिक्षा जीवन निर्माण, व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण पर आधारित होनी चाहिए। ऐसी शिक्षा हासिल करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति से अधिक शिक्षित माना जाना चाहिए जिसने पूरे पुस्तकालय को कण्ठस्थ कर लिया हो। अगर सूचनाएं ही शिक्षित होती तो पुस्तकालय ही संत हो गये हाते। – स्वामी विवेकानंद … Continue readingशिक्षा, शिक्षक और बदलावः एक चुनौती, एक अवसर – मुलख सिंह 

सूचना कानून इतिहास और बदलाव – राजविंदर सिंह चंदी

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(a) के अनुसार हर भारतीय नागरिक को बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। हमने संसदीय लोकतंत्र अपनाया है। जनतंत्र में राज्य की सारी शक्तियाँ जनता में निहित होती हैं। जनता द्वारा अपने कार्यों जिनमें नीतियां, कानून-व्यवस्था,परियोजनाओं, निर्णय, प्राशसनिक गतिविधियों का क्रियान्वयन आदि शामिल है, के लिए सरकार चुनी जाती है। … Continue readingसूचना कानून इतिहास और बदलाव – राजविंदर सिंह चंदी

पहाड़ के पितामह चंडीप्रसाद भट्ट – अमर नाथ

नदियाँ हिन्दुस्तान की धमनियाँ हैं। इनमें जल रूपी रक्त का संचार पहाड़ों से होता है। इन धमनियों की अविरलता बनाए रखने के लिए पहाडों और उनके जंगलों को बचाए रखना अनिवार्य है। चंडीप्रसाद भट्ट ने पर्यावरण के संबंध में अपना ज्ञान अपने अनुभव से अर्जित किया। वे पहाड़ पर जन्मे, पहाड़ पर पले -बढे और उन्होंने पहाड़ को कर्मस्थली बनाकर उसे जिया। … Continue readingपहाड़ के पितामह चंडीप्रसाद भट्ट – अमर नाथ

कोरोना के समय में ऑनलाइन स्कूली शिक्षा – राजेंद्र चौधरी

कोरोना महामारी ने जीवन के ऑनलाइन पक्ष को बढ़ावा दिया है और ऑनलाइन शिक्षा इसका एक प्रमुख घटक है। स्कूल और कॉलेज सबसे पहले बंद हुए थे और शायद सब से अंत में ही खुलें। इस लिए ऑनलाइन की समीक्षा ज़रूरी है। … Continue readingकोरोना के समय में ऑनलाइन स्कूली शिक्षा – राजेंद्र चौधरी

हिन्दी में शोध का धंधा – डॉ. अमरनाथ

वैश्वीकरण के बाद अनुसंधान के क्षेत्र में और भी तेजी से गिरावट आई है. अब तो हमारे देश की पहली श्रेणी की प्रतिभाएं मोटी रकम कमाने के चक्कर में मैनेजर, डॉक्टर और इंजीनियर बनना चाहती हैं और जल्दी से जल्दी विदेश उड़ जाना चाहती हैं. किसी ट्रेडिशनल विषय में पोस्टग्रेजुएट करके शोध करना उन्हें नहीं भाता. जो डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाते वे ही अब मजबूरी में शोध का क्षेत्र चुन रहे हैं. वैश्वीकरण और बाजारवाद ने नयी प्रतिभाओं का चरित्र ही बदल दिया है. … Continue readingहिन्दी में शोध का धंधा – डॉ. अमरनाथ