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मेरे हालात नां पूच्छै – कर्मचंद केसर

Post Views: 884 हरियाणवी गजल मेरे हालात नां पूच्छै। इस दिल की बात नां पूच्छै। फुटपाथ पै बसर करूं सूं। मेरी औकात नां पूच्छैं। मैं सबका सब मेरे सैं, तौं

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सुनील 'थुआ’ – विकलांग जन दया नहीं अधिकार की दरकार

Post Views: 1,154 विकलांग जन हमारे देश की आजादी के 70 साल पूरे होने जा रहे हैं, परन्तु एक वर्ग  अपनी पहचान और नाम के लिए तरस रहा है। हम

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हरियाणा में मीडिया – डा. अशोक कुमार

Post Views: 1,021 डा. अशोक कुमार  हरियाणा बनने के बाद पिछले 50 वर्षों में हरियाणा में बड़े बदलाव हुए हैं। हरियाणा व इसके समाज को सशक्त बनाने में संचार माध्यमों

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रेनू यादव – भारत में उच्च शिक्षा और युवा वर्ग

Post Views: 917 शिक्षा आज भारत का उच्च शिक्षा का ढांचा पूरे विश्व में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों

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गहराता कृषि संकट अंगड़ाई लेता किसान आंदोलन -इन्द्रजीत सिंह

Post Views: 912                 मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान आंदोलन के रूप में फूटे जनाक्रोश के लिए जो कारक जिम्मेदार हैं वे

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कृषि और महिलाएं -अंजू

Post Views: 885 आलेख हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। प्रदेश की जनसंख्या का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कृषि के कार्य में संलग्न है। यहां के निवासियों की आजीविका का मुख्य

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किसानों के नाम मेरा संदेश -छोटू राम (अनु.) हरि सिंह

Post Views: 729 यदि दुनिया में कोई धंधा ऐसा है कि जिसकी नेक कमाई है तो वह यही किसान है। यदि दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति है जो संतोष जीवन

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योगेन्द्र यादव से सुरेन्द्र पाल सिंह की बातचीत – खारिज करना पड़ेगा कृषि विरोधी विकास के मॉडल को

Post Views: 925 सुरेन्द्र पाल सिंह – आज देश में कृषि के संकट की चर्चा हो रही है। आप इसे कैसे परिभाषित करते हैं? इस संकट के क्या कारक हैं?

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कौआ और चिड़िया

Post Views: 1,115 लोक कथा                 एक चिड़िया थी अर एक था कौआ। वै दोनों प्यार प्रेम तै रह्या करै थे। एक दिन कौआ चिड़िया तै कहण लाग्या अक् चिड़िया

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डॉ. आम्बेडकर किसान नेता के रूप में-विनोद कुमार

Post Views: 668 आलेख अर्थशास्त्री, राजनेता, मंत्री लेखक, संविधान निर्माता  आदि सभी रूपों और परिस्थितियों में डा.आम्बेडकर ने किसान हित की अनदेखी नहीं की। वे समय-समय पर सभी रूपों में

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