Tag: विविध

आओ नया समाज बनाएं – राजेंद्र चौधरी

बुनियादी एवं व्यापक बदलाव के लिए अंतत आम जन का, सत्ता से वंचित तबकों का संगठित होना ज़रूरी है. केवल एक पार्टी या नेता के पक्ष में वोट डालने के लिए नहीं अपितु बहुसंख्यक आबादी के हक़ में देश को चलाने के लिए. ज़रूरत इस बात कि है कि पूरा समय शासन व्यवस्था की नकेल प्रभावी रूप से जनता के हाथ में रहे. पॉँच साल में एक बार नहीं अपितु पूरे पॉँच साल लगातार शासन करने वालों में जनता के प्रति जवाबदेही का भाव रहे और जनता की सत्ता में बैठे लोगों पर कड़ी निगाह रहे. … Continue readingआओ नया समाज बनाएं – राजेंद्र चौधरी

मोरनी हिल्ज़ः नरबलि और उसके बाद – सुरेंद्र पाल सिंह

Post Views: 560 हरियाणा के एकमात्र हिल स्टेशन मोरनी हिल्ज़ की खूबसूरत वादियों में हरी भरी पहाड़ियाँ, एक पुराना क़िला, घग्गर नदी का उतरता चढ़ता हुआ बहाव, पानी का एक

Continue readingमोरनी हिल्ज़ः नरबलि और उसके बाद – सुरेंद्र पाल सिंह

बाज़ारवाद का नीतिगत विरोध नाकाफी, निजी जीवन में भी ज़रूरी-राजेन्द्र चौधरी

लेखक महर्षि दयानंद विश्विद्यालय, रोहतक के पूर्व प्रोफेसर तथा कुदरती खेती अभियान, हरियाणा के सलाहकार हैं. … Continue readingबाज़ारवाद का नीतिगत विरोध नाकाफी, निजी जीवन में भी ज़रूरी-राजेन्द्र चौधरी

बेहतर समाज: अब नहीं तो कब? – राजेंद्र चौधरी

इस अवसर पर परिवर्तन के प्रति आशावान होने के कुछ विशेष कारण भी हैं. वर्तमान व्यवस्था कि कई कमज़ोरियाँ जो दबी ढकी थी, वो उघड कर सामने आ गई हैं, सब से बड़ी बात तो यह है कि बहुत बड़े पैमाने पर देश की जनता के पास कोई आर्थिक सुरक्षा और बचत नहीं है, उन की कमाई बमुश्किल इतनी है कि रोज़ कमाते हैं और खाते हैं. और जिन के पास चंद दिनों की तालाबंदी सहन करने की ताकत नहीं है, बुढ़ापा और बीमारी तो उन को भी आती होगी, तब क्या होता होगा इनका, यह सोच कर भी डर लगता है. … Continue readingबेहतर समाज: अब नहीं तो कब? – राजेंद्र चौधरी

पंजाब का सांस्कृतिक त्यौहार लोहड़ी – डा. कर्मजीत सिंह अनुवाद – डा. सुभाष चंद्र

लोहड़ी पंजाब के मौसम से जुड़ा ऐसा त्यौहार है, जिसकी अपनी अनुपम विशेषताएं हैं। जैसे यह त्यौहार पौष की अंतिम रात को मनाया जाता है, जबकि भारत के दूसरे भागों में अगले दिन ‘संक्रांति’ मनाई जाती है। इस त्यौहार पर पंजाब के लोग आग जलाते हैं। संक्रांति पर ऐसा नहीं होता, केवल नदियों-सरोवरों में स्नान किया जाता है। लोहड़ी में तिलों और तिलों की रेवड़ियों की आहूति दी जाती है। … Continue readingपंजाब का सांस्कृतिक त्यौहार लोहड़ी – डा. कर्मजीत सिंह अनुवाद – डा. सुभाष चंद्र

कैसे मिटे गांव की प्यास – भारत डोगरा

ग्रामीण पेयजल की समस्या बढ़ती जा रही है। सरकारी आंकड़े चाहे उपलब्धियों का कुछ भी दावा करें, पर वास्तविक स्थिति बहुत चिंताजनक है। इस कारण स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, महिला कल्याण आदि विभिन्न क्षेत्रों की क्षति हो रही है। … Continue readingकैसे मिटे गांव की प्यास – भारत डोगरा

पंचकूला से मेलबॉर्न – सुरेन्द्रपाल सिंह

Post Views: 472 थेम्स नदी में कितने ही समुद्री जहाज एक ही स्थान पर खड़े हैं और उनमें सज़ायाफ्ता कैदियों को रखा जाता है। स्थिति यहाँ तक पहुंच चुकी है

Continue readingपंचकूला से मेलबॉर्न – सुरेन्द्रपाल सिंह

मां – कामरेड पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया

मेरी मां सारी उम्र मेरी सहयोगी बल्कि यो कहिए संघर्ष की साथी रही। पहले मेरी पढ़ाई जारी रखने के लिए और फिर मार्क्सवादी पार्टी की राजनीति (मजदूरों किसानों की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए) ताउम्र मेरा साथ देती रही। उसने अपने जेवरात, गांव के 2 प्लॉट तथा उसके नाम की 20 एकड़ जमीन मुझे  बेचने के लिए दे दी। … Continue readingमां – कामरेड पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया

कनाडाः  शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की मिसाल – सुरेंद्र पाल सिंह

Post Views: 408 (हर समाज-देश की एक विशिष्ट संस्कृति है। मानव के विकास क्रम में आबादियां एक जगह से दूसरी जगह जाकर बसती रही हैं। जिससे मनुष्य एक दूसरे समुदाय

Continue readingकनाडाः  शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की मिसाल – सुरेंद्र पाल सिंह

नियमगिरी : कंपनी ‘विकास’ के बढ़ते अंधेरे के ख़िलाफ़ आदिवासियों का प्रतिवाद

Post Views: 325 अनिल अंशुमन नियमगिरी : कंपनी ‘विकास’ के बढ़ते अंधेरे के ख़िलाफ़ आदिवासियों का प्रतिवाद तमाम सत्ताधारी राजनीतिक दलों की संगठित चुप्पी के बावजूद प्रदेश की राजधानी भुवनेश्वर

Continue readingनियमगिरी : कंपनी ‘विकास’ के बढ़ते अंधेरे के ख़िलाफ़ आदिवासियों का प्रतिवाद