Tag: विरासत

महर्षि दयानंद सरस्वती : हिंदी के प्रथम सेनापति – प्रो. अमरनाथ

Post Views: 55 आर्यसमाज के अवदान को आज लोग भूल चुके हैं किन्तु एक समय में हिन्दू समाज को कुरीतियों, कुप्रथाओं, अंधविश्वासों और कुसंस्कारों से मुक्त करने में आर्यसमाज की

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गुणाकर मुले : विज्ञान को हिन्दी में सुलभ कराने वाले अप्रतिम योद्धा – प्रो. अमरनाथ

Post Views: 69 सरल हिन्दी में विज्ञान को जन -जन तक पहुँचाने में मराठी भाषी गुणाकर मुले ( 3.1.1935) का योगदान अप्रतिम है. महाराष्ट्र के अमरावती जिले में जन्म लेने

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हिन्दी की गांधीवादी आलोचना -प्रो. अमरनाथ

गांधी जी के अनुसार सच्चा प्रजातंत्र कभी भी हिंसा और दंड-विधान के बल पर कायम नहीं किया जा सकता. व्यक्ति के पूर्ण और स्वतंत्र विकास के लिए जनतांत्रिक समाज को परस्पर सहयोग और सद्भाव, प्रेम और विश्वास पर आधारित रहना चाहिए. मानवता का विकास इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर आज तक हुआ है और आगे भी होगा. (लेख से) … Continue readingहिन्दी की गांधीवादी आलोचना -प्रो. अमरनाथ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ः मुक्ति और प्रेम के कवि- प्रो. सुभाष चन्द्र

फैज का रचनाकार अपने जीवन अनुभवों की पूंजी से रचना करता है, इसीलिए वह लाऊड होकर भी विश्वसनीय होती है। अपने युग के अन्तर्विरोधों, सत्ता की क्रूरताओं-अत्याचारों और मेहनतकश के संघर्षों-आन्दोलनों को अभिव्यक्त करने का संकल्प लिया और उस दायित्व को बखूबी निभाया। फैज शायरी में अपने निजी दुख-दर्दों-पीड़ाओं का रोना नहीं रोते, बल्कि अपनी तकलीफों और जमाने की तकलीफों को एकमएक कर देते हैं। अपने अनुभवों का विस्तार करके उनको आमजन की तकलीफों से गूंथ देने से फैज की कविताएं सामूहिक गान और आह्वान गीत की शक्ल अख्तियार करती जाती हैं और पाठक पर गहरा असर करती है। (लेख से) … Continue readingफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ः मुक्ति और प्रेम के कवि- प्रो. सुभाष चन्द्र

बूढ़ासागर की पथरीली पटरियों पर: एक संस्मरण – कनक तिवारी

दिग्विजय महाविद्यालय के परिसर में अपने जिस पहले मकान में वे रहे थे, ठीक उसके पीछे बूढ़ासागर की पथरीली पटरियों पर बैठकर उस वक्त के शीर्षक ‘आशंका के द्वीपः अंधेरे में‘ वाली कविता का एकल श्रोता बनना मेरे नसीब में आया। (पोस्ट से) … Continue readingबूढ़ासागर की पथरीली पटरियों पर: एक संस्मरण – कनक तिवारी

बाबा फरीद और हमारा समाज- सुमेल सिंह सिद्धू

सत्यशोधक फाउंडेशन व देस हरियाणा पत्रिका द्वारा आयोजित हरियाणा सृजन यात्रा के दौरान हांसी स्थित चार कुतुब में आयोजित सेमिनार में पंजाबी व सूफी साहित्य के जाने-माने विद्वान डॉ. सुमेल सिंह सिद्धू ने बाबा फरीद और हमारा समाज विषय पर व्याख्यान दिया। सेमिनार का संचालन करते हुए देस हरियाणा के संपादक डॉ. सुभाष चन्द्र ने कहा कि आज जान लेने वाले सड़क पर हैं, लेकिन देने वाले नहीं हैं। संतों-भक्तों व मध्यकाल के महापुरूषों के विचारों को खंगालने की जरूरत है, जोकि हमारी विरासत है। इस व्याख्यान की प्रस्तुति देस हरियाणा के सह-संपादक अरुण कुमार कैहरबा ने की है … Continue readingबाबा फरीद और हमारा समाज- सुमेल सिंह सिद्धू

त्रिमूर्ति राह दिखाएगी- सुभाष गाताड़े

‘गांधी, अंबेडकर और भगत सिंह के चिंतन की सांझी जमीन’ विषय पर डॉ. भीम राव आंबेडकर के विचारों के विशेष संदर्भ में विचार रखने के लिए प्रसिद्ध दलित चिंतक सुभाष गाताड़े जी को आमंत्रित किया गया था। किन्हीं कारणों से वे सृजन उत्सव में नहीं पहुंच पाए। उन्होंने लिखित संदेश भेजा था जिसे देस हरियाणा के संपादक डॉ. सुभाष चन्द्र ने प्रस्तुत किया। उनका यह संदेश यहां दिया जा रहा है।- सं. … Continue readingत्रिमूर्ति राह दिखाएगी- सुभाष गाताड़े

छुआछूत और सिक्ख पंथ: सौ साल पहले की कहानी- सुरेन्द्र पाल सिंह

जन्म – 12 नवंबर 1960 शिक्षा – स्नातक – कृषि विज्ञान स्नातकोतर – समाजशास्त्र सेवा, व्यावहारिक मनौवि‌ज्ञान, बुद्धिस्ट स्ट्डीज – स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत लेखन – सम सामयिक मुद्दों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित सलाहकर – देस हरियाणा कार्यक्षेत्र – विभिन्न संस्थाओं व संगठनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों विशेष तौर पर लैंगिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय, सांझी संस्कृति व साम्प्रदायिक सद्भाव के निर्माण में निरंतर सक्रिय, देश-विदेश में घुमक्कड़ी में विशेष रुचि-ऐतिहासिक स्थलों, घटनाओं के प्रति संवेदनशील व खोजपूर्ण दृष्टि। पताः डी एल एफ वैली, पंचकूला मो. 98728-90401 … Continue readingछुआछूत और सिक्ख पंथ: सौ साल पहले की कहानी- सुरेन्द्र पाल सिंह

गाँधी, अम्बेडकर और भगत सिंह के चिंतन की सांझी जमीन- प्रोफेसर जगमोहन

हरियाणा सृजन उत्सव में ‘गाँधी, अम्बेडकर और भगत सिंह के चिन्तन की सांझी जमीन’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में शहीद भगत सिंह के भांजे व प्रख्यात चिंतक प्रो. जगमोहन सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए. सत्र का संचालन हरविन्द्र सिंह सिरसा ने किया. प्रस्तुति देस हरियाणा टीम के युवा सदस्य योगेश शर्मा ने की है. … Continue readingगाँधी, अम्बेडकर और भगत सिंह के चिंतन की सांझी जमीन- प्रोफेसर जगमोहन

गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना – बूटा सिंह सिरसा 

देश के आजादी आंदोलन में गदर पार्टी की भूमिका को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया जो मिलना चाहिए था। पंजाब व पंजाबी भाषायी क्षेत्र के बाहर बहुत कम लोग गदर पार्टी के बलिदानों से परिचित हैं। 1 जनवरी 2020 गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना का 150 वां जन्म दिन है। … Continue readingगदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना – बूटा सिंह सिरसा