Tag Archives: विरासत

ईसामसीह की दयालुता

डा. कामिल बुल्के ईसामसीह के दिल में सबके लिए प्रेम था। वह किसी से भी घृणा नहीं करते थे। लोग जिन्हें पापी और बुरा मानते थे, उनके लिए भी ईसा के दिल में दया का भाव रहता था। उनके जमाने में एक सम्प्रदाय था फरीसी। उस सम्प्रदाय के मानने वाले मूसा-संहिता की बहुत ही संकीर्ण व्याख्या करते थे और उस

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सावित्री बाई फुले याद यो, कररया हिन्दुस्तान तनै

मुकेश यादव प्रथम शिक्षिका होणे का, देें गौरव-सम्मान तनै सावित्री बाई फुले याद यो, कररया हिन्दुस्तान तनै ज्योतिबा तै पढ़कै नै, मन म्हं यो अहसास हुया पीड़िता शोषित जनता का यो, अनपढ़ता तै नाश हुया सबका पढ़णा घणा जरूरी, यो पक्का विश्वास हुया बालिका स्कूल पुणे म्हं खोल्या, यो पहला प्रयास हुया भले तालाब महं फैंकी कांकर, हथेली पै राक्खी

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 गुरुनानक और सांझी संस्कृति की विरासत

सुभाष चन्द्र   बाबा नानक शाह फकीर हिन्दू का गुरु, मुसलमान का पीर 1 गुरु नानक का जन्म 1469 में, पंजाब प्रान्त के ननकाना साहब नामक स्थान पर हुआ, जो आज कल पाकिस्तान में है। वे महान विचारक और समाज सुधारक थे। उनका व्यक्तित्व साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने इनसान की समानता का संदेश दिया। वे सभी धर्मों का आदर करते

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हरियाणा में 1857 का राष्ट्रीय विद्रोह

प्रो सूरजभान  भारत में इस वर्ष 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह की 150वीं सालगिरह मनाई जा रही है। इस विद्रोह को देसी और विदेशी इतिहासकारों ने अपनी – अपनी दृष्टियों से देखने और इसके महत्व को आंकने की कोशिश की थी, परन्तु आजादी के बाद 1857 की घटनाओं से संबंधित काफी नई जानकारी प्राप्त हुई है। इन दस्तावेजों, अखबारों आदि के

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गुरु नानक की दरियादिली

देवेन्द्र सत्यार्थी    नीची अन्दर नीच जाति नीची हूं अति नीचु । नानकु तिनके संगि साथि वडिया सिउ किया रीस। जिथै नीच समाली अनि तिथै नदरि तेरी बसीस।। गुरु नानक को कौन नहीं जानता! वह मुगल सम्राट बाबर के समय में हुए। उन्होंने भारत पर बाबर के हमले को अपनी आंखों देखा था। उसमें लोगों पर जो मार पड़ी, उससे

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हांसी से बही सूफी विचारधारा

हांसी से बही सूफी विचारधारा स्वामी वाहिद काज़मी हांसी में स्थित दरगाह चहार कुतब। प्रख्यात चार सूफी संतों का मकबरा ।  ‘कुतब’ शब्द  आदर्श  व्यक्ति प्रयोग होता है। यहां दफन महान सूफी संतों या कुतब जमाल उद दीन हांसवी, बुरहानुद् दीन, कुतुबुद्दीन मनुव्वर और नूरूद्दीन हैं। उस समय के कई मुस्लिम गणमान्य व्यक्तियों के मकबरे भी दरगाह में है जैसे

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