Tag: विपिन चौधरी

ओबरा -विपिन चौधरी

Post Views: 267 हरियाणवी कविता जद ताती-ताती लू चालैं नासां तैं चाली नकसीर ओबरे म्हं जा शरण लेंदे सिरहानै धरा कोरा घड़ा ल्हासी-राबड़ी पी कीं काळजे म्हं पड़दी ठंड एक

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डाब के खेत – विपिन चौधरी

Post Views: 251 हरियाणवी कविता डाब कै म्हारे खेतां म्हं मूंग, मोठ लहरावे सै काचर, सिरटे और मतीरे धापली कै मन भावै सै रै देखो टिब्बे तळै क्यूकर झूमी बाजरी

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मेरा सादा गाम – विपिन चौधरी

Post Views: 183  हरियाणवी कविता म्हारी बुग्गी गाड्डी के पहिये लोहे के सैं जमां चपटे बिना हवा के जूए कै सेतीं जुड़ रहे सैं मण हामी इसे म्हं बैठ उरै

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टूम ठेकरी – विपिन चौधरी

Post Views: 143 हरियाणवी कविता जी करै सै आज दादी की तिजोरी मैं तै काढ़ ल्याऊं सिर की सार,धूमर अर डांडे नाक की नाथ, पोलरा कान की बुजली, कोकरू अर

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गांव की छोरियां -विपिन चौधरी

Post Views: 188 हरियाणवी कविता गोबर चुगणे नै गांव की छोरियां खेल समझैं तो बड़ी बात कोनी ऊपर ताईं गोबर भरा तांसळा खेल-खेल म्हं भर लिया काम का काम भी

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हरियाणा में हिन्दी कहानी का परिदृश्य

Post Views: 732 ज्ञान प्रकाश विवेक ज्ञान प्रकाश विवेक हरियाणा के प्रख्यात कथाकार हैं। उन्होंने नई कथा-भाषा का सृजन करते हुए कहानी को कलात्मक उच्चता प्रदान की है। अपने समय

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हरियाणा में रचित हिन्दी कविता की अर्धशती -राजेन्द्र गौतम

Post Views: 863 साहित्य हरियाणा में रचित समकालीन हिन्दी कविता पर बात करते हुए एक दिक्कत सामने आती है। कविता का पार्थक्य भाषाओं और अलग-अलग काल-खंडों के आधार पर तो

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