Tag: विनोद सिल्ला

दायरे -विनोद सिल्ला

Post Views: 145 विनोद सिल्ला कविता कर लिए कायम दायरे सबने अपने-अपने हो गए आदि तंग दायरों के कितना सीमित कर लिया खुद को सबने नहीं देखा कभी दायरों को

Continue readingदायरे -विनोद सिल्ला

जंगली कौन – विनोद सिल्ला

Post Views: 107 विनोद सिल्ला कितना भाग्यशाली था आदिमानव तब न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा था हिन्दू-मुसलमान का न कोई झगड़ा था छूत-अछूत का न कोई मसला था

Continue readingजंगली कौन – विनोद सिल्ला

लजीज खाना

Post Views: 260 विनोद सिल्ला कविता मैं जब कई दिनों बाद गया गाँव माँ ने अपने हाथों से बनाई रोटी कद्दू की बनाई मसाले रहित सब्जी रोटी पर रखा मक्खन

Continue readingलजीज खाना

तरक्की का दौर -विनोद सिल्ला

Post Views: 124 विनोद सिल्ला कविता तरक्की के दौर में गुम हो गया भाईचारा टूट गई स्नेह की तार व्यक्ति का नाम छिप गया सरनेम की आड़ में पड़ोसी हो

Continue readingतरक्की का दौर -विनोद सिल्ला

जड़ों में मट्ठा- विनोद सिल्ला

Post Views: 178 विनोद सिल्ला कविता मंच से उनका भाषण था समाज को ऊर्जा देने वाला समाज सेवा में उनका नाम था अव्वल हर तरफ उनके नाम की बोलती थी

Continue readingजड़ों में मट्ठा- विनोद सिल्ला

अनसुलझा प्रश्न

Post Views: 182 विनोद सिल्ला  बनाया जिसने राजमहलों, भवनों, मिनारों को तरसता रहा वो ताउम्र छाँव के लिए खोदा जिसने तालाबों, कुओं, बावड़ियों को तरसता रहा वो ताउम्र पेयजल के

Continue readingअनसुलझा प्रश्न