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प्रेमचंद की प्रासंगिकता

  आज के समय में प्रेमचंद के साथ हमारा क्या रिश्ता बनता है। प्रेमचंद और हमारे साहित्यकार किस तरह से आने वाली पीढिय़ों को रस्ता दिखाते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। प्रेमचंद 1936 में इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन वे समय बीतने के साथ-साथ और अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। वे 1880 में पैदा हुए और 1907-08

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साहित्य कैसे पढ़ाएं

साहित्य मनुष्यता निर्माण की परियोजना है, उसका अध्ययन-अध्यापन भी इसी संदर्भ में सार्थकता प्राप्त करता है। साहित्यिक रचना के मर्म और सौंदर्य का उद्घाटन ही साहित्य के अध्यापक का काम है। इस कार्य को कैसे किया जाए डा. अशोक भाटिया के 35 सालों के उच्च शिक्षा में अध्यापन व कथा लेखन के अनुभवों सा सार . -डा. अशोक भाटिया

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प्रेमचंद और हमारा समय

  प्रेमचंद ने हिंदी और भारतीय साहित्य को गहरे से प्रभावित किया.साहित्य को यथार्थ से जोड़ा. किसान-मजदूर का शोषण, दलित उत्पीड़न, साम्प्रदायिक-विद्वेष, लैंगिक असमानता की समस्या के विभिन्न पहलुओं पर अपनी कलम चलाई. गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, प्रेमाश्रम, निर्मला, गबन उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। अनेक कहानियां लिखी जिंहोंने समाज की चेतना को झकझोरा. कफन, ठाकुर का कआं, सदगति, सवा सेर गेहूं,

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हुब्बे वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती की पुण्य तिथि के अवसर पर। हाली का जन्म हुआ था सन् 1837 में और मृत्यु हुई 31 दिसंबर 1914 में। हाली की एक कविता है ‘हुब्बे वतन’ यानी देश-प्रेम।  हरियाणा सृजन उत्सव में जन नाट्य मंच कुरुक्षेत्र ने  25 फरवरी 2017 को इसके एक अंश को प्रस्तुत किया था।  अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती   हुब्बे

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चुप की दाद

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती ऐ मांओं बहनों, बेटियों, दुनियां की ज़ीनत1 तुमसे है मुल्कों की बस्ती हो तुम्ही, क़ौमों की इज़्ज़त तुमसे है तुम घर की हो शहज़ादियाँ, शहरों की हो आबादियाँ ग़म गीं दिलों की शादियाँ, दुख-सुख में राहत तुम से है   हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 25 फरवरी 2017 की सांस्कृतिक संध्या में विनोद सहगल द्वारा गाई

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आचरणगत धर्म और कर्मकांडी धर्म में फर्क करो

ओम सिंह अशफाक 6 दिसंबर 2018 बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्माण दिवस के अवसर पर. धर्म और राजनीति विषय पर परिचर्चा में ओम सिंह अशफाक ने गुरु रविदास कबीर दास के माध्यम से अपनी बात कहते हुए जोर दिया कि आचरणगत धर्म ही धर्म का सच्चा स्वरूप है। पाखंड से धर्म विकृत होता है। यदि राजनीति से धर्म

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