Tag Archives: विकास साल्याण

नयी सुबह तक

कुरुक्षेत्र, 10 मार्च देस हरियाणा द्वारा स्थानीय महात्मा ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय में देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिव रमन गौड के काव्य-संग्रह नयी सुबह तक पर समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में शिव रमन गौड ने अपने काव्य-संग्रह की कविताओं का पाठ किया। संगोष्ठी का शुभारंभ महात्मा

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हरियाणा सृजन उत्सव 2019, कार्यक्रम

तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव  का आगाज हो चुका है। हर वर्ष यह कार्यक्रम फरवरी के महीने में कुरूक्षेत्र में आयोजित किया जाता है। यह एक साहित्यिक-सांस्कृतिक और समाजिक गतिविधियों का कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का आयोजन देस हरियाणा पत्रिका  की तरफ से किया जाता है। सृजन उत्सव हरियाणा में होने वाला साहित्यिक महाकुम्भ माना जाता है। इसकी शुरूआत वर्ष 2016 में

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ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन

विकास साल्याण  (देस हरियाणा फ़िल्म सोसाइटी के तत्वावधान में डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र में 2 सितंबर 2018 को पर्यावरण संकट पर केन्द्रित फ़िल्म ‘कार्बन’ की प्रस्तुति की गई, जिसमें विभिन्न विद्वानों, बुद्धिजीवियों व नागरिकों ने फ़िल्म पर चर्चा में हिस्सा लिया। फिल्म में मुख्य भूमिका में यशपाल शर्मा, जैकी भगनानी,नवाजुद्दीन सिद्दिकी, प्राची देसाई हैं । इस संवेदनशील फ़िल्म

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विकास साल्याण – अलीगढ़ : समलैंगिकता पर विमर्श

समलैंगिकता को अलग-अलग दृष्टि से देखा जाता है कुछ समलैंगिकता को मानसिक बीमारी मानते हैं। कुछ इसे परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आदत मानते हैं तो कुछ एक सामान्य प्राकृतिक कृत्य मानते हैं। लेकिन तीनों ही स्थितियों में किसी भी प्रकार से इसे अपराध या पाप नहीं माना जा सकता। वह कार्य जिसे बिना किसी को कोई नुकसान पहुंचाए अपनी इच्छा

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विकास साल्याण – ‘दायरा’ संकीर्ण सामाजिक दायरों पर प्रहार

सिनेमा-चर्चा रोहतक के फि़ल्म एवम् टेलीविजन संस्थान के छात्रों द्वारा बनाई गई ‘दायरा’ फि़ल्म हरियाणवी सिनेमा को नई दिशा की ओर ले जा रही है। इस फिल्म में उस गहरे व कड़वे मुद्दे को उठाया गया है। जिसके कारण हरियाणा विश्व में प्रसिद्ध है वह मुद्दा है ऑनर-किलिंग का। जो वास्तव में बड़ा गम्भीर व संवेदनशील विषय है। लेकिन ‘दायरा’

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हरियाणा: खेलों में उपलब्धियां

हरियाणा प्रांत के खिलाड़ी दुनिया भर में भारतवर्ष का डंका बजा रहे हैं। नवम्बर 1966 को हरियाणा प्रदेश भारत के सत्रहवें राज्य के रूप में मानचित्र पर आया था। पहले से ही सामाजिक पर्वों, उत्सवों व मेलों के अवसरों पर ताकत आजमाने वाले खेलों जैसे कबड्डी, कुश्ती और रस्साकसी आदि खेलों के आयोजन की परम्परा रही है। विश्व स्तर की खेल स्पर्धाओं जैसे एशियाड़, राष्ट्रमंडल तथा ओलम्पिक की खेल प्रतियोगिताओं में भारत के द्वारा जीते गए कुल पदकों में अकेले हरियाणा प्रांत के खिलाड़ियों द्वारा लगभग 35 प्रतिशत पदकों को प्राप्त किया है, जिसमें ताकत के खेल माने जाने वाले कुश्ती, कबड्डी और मुक्केबाजी में सर्वाधिक पदक अर्जित किए हैं।

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हरियाणा के दर्शकों की अभिरूचियां

हरियाणा सृजन उत्सव में  24 फरवरी 2018 को ‘हरियाणा के दर्शकों की अभिरूचियाँ’ विषय पर परिचर्चा हुई जिसमें फ़िल्म अभिनेता व रंगकर्मी यशपाल शर्मा, सीनियर आईएएस वीएस कुंडू, और गौरव आश्री ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस परिचर्चा का संचालन  किया संस्कृतिकर्मी प्रो. रमणीक मोहन ने। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के मुख्य अंश – सं.

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