Tag: लोक कला

हरियाणवी लोकनृत्यों का अद्भुत रचना संसार – अनिल कुमार पाण्डेय

Post Views: 49 भारत विविधताओं का देश है। देश की संस्कृति अत्यंत ही समृद्ध, मनोहारी होने के साथ ही विस्मयकारी भी है। हर अंचल विशेष की सांस्कृतिक पहचान अत्यंत ही

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उस्ताद धुलिया खान

लखमी चंद जब भी कोई धुन रचते और उस्ताद धुलिया खान से सारंगी के मधुर वादन पर उस धुन को सुनते तो झूम उठते और तब एक ही बात उनकी जुबान से निकला करती – उस्ताद। कमाल कर दिया।  … Continue readingउस्ताद धुलिया खान

हरियाणवी लोक सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है पगड़ी – महासिंह पूनिया

किसी समाज की संस्कृति, रहन-सहन, भोजन व वेशभूषा को वहां के जीवनयापन के साधन व वहां की जलवायु सर्वाधिक प्रभावित करती है। अस्तित्व के संघर्ष में उत्पन्न आवश्यक वस्तुएं कालांतर में सांस्कृतिक प्रतीकों व चिह्नों में तब्दील हो जाया करती हैं। मानव समाज इन्हें अपनी पहचान से जोड़ लेता है। समाज विशेष की वेशभूषा ने इस सांस्कृतिक सफर को तय किया है। गर्मी-सर्दी से बचने के लिए तथा काम करते वक्त सिर ढकने वाला कपड़ा कब पुरुषों की इज्जत व स्त्रिायों की लाज का प्रतीक बन जाएगा। कब यह सामन्ती ठसक का रूप लेकर उत्पीड़न का प्रतीक बन जाएगी। महासिंह पूनिया का ‘पगड़ी’ पर केन्द्रित आलेख प्रकाशित कर रहे हैं। … Continue readingहरियाणवी लोक सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है पगड़ी – महासिंह पूनिया