Tag: लोक कथा

रुरु जातक

Post Views: 10 रुरु एक मृग था। सोने के रंग में ढला उसका सुंदर सजीला बदन; माणिक, नीलम और पन्ने की कांति की चित्रांगता से शोभायमान था। मखमल से मुलायम

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राजा आलोचना नहीं सुनना चाहता

Post Views: 40 राजा और उसके मन्त्री विलासी थे। खजाना खाली हो गया। आश्रमों की वृत्ति बंद हो गयी। ऋषि ने कहा कि  देश की संस्कृति और देश की प्रज्ञा

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गुगा पीर की छड़ी, नानी कूद के पड़ी – सोनिया सत्या नीता

Post Views: 742 भादव के शुरू होते ही डेरू बजने की परम्परा भी जीवंत होती है. गांव देहात मे भादव के आने पर डेरू वाले एकम से लेकर नवमी तक

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सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

Post Views: 600 हरियाणवी लोककथा एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या

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कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

Post Views: 433 लोक कथा एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर

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हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

Post Views: 654 प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने

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डरैगा सो मरैगा

Post Views: 299 राजकिशन नैन एक बै जंगल के सारे खरगोशां नै आपणी सभा करी अर सभ आपणे-आपणे दुःखां का रोणा रोण लागे। एक जणां बोल्या, ‘आखिर कित लिकड़ कै

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किताब का लिख्या

Post Views: 275  राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) घसीटा कतई भोला अर घणा सीधा

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