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राजा आलोचना नहीं सुनना चाहता

Post Views: 21 राजा और उसके मन्त्री विलासी थे। खजाना खाली हो गया। आश्रमों की वृत्ति बंद हो गयी। ऋषि ने कहा कि  देश की संस्कृति और देश की प्रज्ञा…

गुगा पीर की छड़ी, नानी कूद के पड़ी – सोनिया सत्या नीता

Post Views: 667 भादव के शुरू होते ही डेरू बजने की परम्परा भी जीवंत होती है. गांव देहात मे भादव के आने पर डेरू वाले एकम से लेकर नवमी तक…

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सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

Post Views: 582 हरियाणवी लोककथा एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या…

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हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

Post Views: 633 प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने…

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डरैगा सो मरैगा

Post Views: 285 राजकिशन नैन एक बै जंगल के सारे खरगोशां नै आपणी सभा करी अर सभ आपणे-आपणे दुःखां का रोणा रोण लागे। एक जणां बोल्या, ‘आखिर कित लिकड़ कै…

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किताब का लिख्या

Post Views: 264  राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) घसीटा कतई भोला अर घणा सीधा…