Tag: लोकविनोद

थाम भी के बस ल्योगे

Post Views: 213 संक्रात का दिन था। किसान नै सुण राख्या था अक् संक्रांत ने गरूड़ दीखज्या तो बड़ा आच्छा हो सै। उसने खेत मेें तै आंदे होए राही में

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ऊकडूं बैठणा अर फूंक मारणा ए घरेलू सै

Post Views: 194 एक देहाती शहर के डाक्टर धोरै जाकै बोल्या-डाक्टर साब, मेरै खांसी जुकाम होर्या सै कोए देशी घरेलू सा नुक्सा बताओ नै। डाक्टर बोल्या-1 किलो चीनी, 50 ग्राम

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लेके रहेंगे-लेके रहेगे

Post Views: 316 एक बै जागरूक माच्छरां नै मिलकै एक सभा बुलाई-उनका नेता बोल्या-भाईयो! ‘हमारे साथ बड़ी बेइन्साफी हो रही है-जुल्म ढाए जा रहे हैं। देखो-साबुन के लिए साबुणदानी, मसालों

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मेज तलै है जी

Post Views: 187 एक बै एक स्कूल में डी.ओ. चली गई। उस स्कूल को दसमी कलास में छोरे पढ़ाई में रद्दी थे अर उनके नाम थे-होशियार सिंह और कशमीर सिंह।

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वेरी गुड

Post Views: 191   एक अणपढ़ माणस नै अंग्रेजी सीखण का शौंक होग्या। सिखाण आला मास्टर भी भागां करकै ए मिलग्या। एक हफ्ते में तीन शब्द सिखाए-‘यश, नो, वैरी गुड’।

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जुत्ती हाथां म्हें ठार्या सूं

Post Views: 147   एक छिकमा एं कंजूस दुकानदार था। उसकी देखमदेख छोरा उसतै भी घणा मंजी होग्या। एक दिन दुकानदार सांझ नै आण की क्है कै शहर चला गया।

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हम पढऩे-लिखने वालों की तो बात ही कुछ ओर है

Post Views: 252 तीन चूहे बड़े जिगरी यार थे। घणे दिनां में फेट्टे तो उनमें एक जुणसा मरियल था-न्यूं बोल्या अक् रै कड़ै रह्या करो-वे दोनों मोटे ताजे थे। उनमैै

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बख्त की इसी-तिसी होर्यी सै

Post Views: 179 एक बै की बात सै एक ताऊ रेल में सफर करै था। छोरा तो उसके था नहीं, वो खुदे बेटी के पीलिया जावै था अर एक गठड़ी

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