कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

Post Views: 380 लोक कथा एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर…

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बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै- विक्रम राही

Post Views: 270 बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै जै गर्भ बीच तै बचा लई तो आग्गे फेर दई मार तनै लिंगानुपात सुधर गया इसका कारण…

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साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा- विक्रम राही

Post Views: 644 विक्रम राही साथ चांदडे माणस का दिया होया तंग करज्यागा जीण जोग भी खामैखा तो बिन आई मैं मरज्यागा चतुर चलाक बेशर्म आदमी सदा मीट्ठे चोपे लावैगा…

छब्बीस जनवरी आले पर ना बात होवै सविंधान की- विक्रम राही

Post Views: 209 विक्रम राही छब्बीस जनवरी आले पर ना बात होवै सविंधान की टैंक तोप झांकी भाषण तै खुश जनता हिन्दूस्तान की । सविंधान सभा नै लिखया म्हारा संविधान…

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अम्मा का संसार – डा. राजेंद्र गौतम

Post Views: 441 (वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक राजेंद्र गौतम, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग से सेवानिवृत हुए हैं। इनके दोहे छंद-निर्वाह की कारीगरी नहीं, बल्कि आधुनिक कविता के तमाम गुण लिए…

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रोज ताण ल्यो कट्टे पिस्टल जेली और तलवारां नै- विक्रम राही

Post Views: 449 विक्रम राही रोज ताण ल्यो कट्टे पिस्टल जेली और तलवारां नै हांगें आली जिद्द ले बैठी या बहोत घणे परिवारां नै छोट्टी मोट्टी कहया सुणी रुप दूसरा…