Tag: लोकधारा

मेवाती शायर सादल्ला, जिसने मेवाती बोली में लोक महाभारत रचा – जीवन सिंह

Post Views: 19 आपको यह जानकर खुशी होगी कि जिस नूह में पिछले दिनों सांप्रदायिक दंगे कराये गये उसी इलाके में नूह के नज़दीक आकेड़ा गांव में अठारहवीं सदी में

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बिरजू महाराज

पंडित बिरजू महाराज : सम्पूर्ण सृष्टि में नृत्य तलाशने वाला नर्तक- जगन्नाथ दुबे

बिरजू महाराज का निधन वाकई भारतीय नृत्य कला के लिए एक बड़ी क्षति है। वे महान नर्तक के अलावा अच्छे साहित्य के पारखी थे। बिरजू महाराज ने हिंदी साहित्य के अनेक रचनाकारों की रचनाओं को कथक नृत्य कला में प्रवेश दिलवाया। जगन्नाथ दुबे यहाँ बिरजू महाराज के जीवन के बारे में संक्षिप्त रुप में बात कर रहे हैं। … Continue readingपंडित बिरजू महाराज : सम्पूर्ण सृष्टि में नृत्य तलाशने वाला नर्तक- जगन्नाथ दुबे

वीर उधम सिंह – इंदर सिंह लांबा

Post Views: 113 सुणो अजूबा खास भाई, कर पक्का विश्वास आई रचा नया इतिहास भाई, वीर उधम सिंह ने सात साल की उम्र हुई जब, पहाड़ दुखों का टूट गया

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हरियाणवी लोकनृत्यों का अद्भुत रचना संसार – अनिल कुमार पाण्डेय

Post Views: 46 भारत विविधताओं का देश है। देश की संस्कृति अत्यंत ही समृद्ध, मनोहारी होने के साथ ही विस्मयकारी भी है। हर अंचल विशेष की सांस्कृतिक पहचान अत्यंत ही

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किसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

मनजीत भोला का जन्म सन 1976 में रोहतक जिला के बलम्भा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ. इनके पिता जी का नाम श्री रामकुमार एवं माता जी का नाम श्रीमती जगपति देवी है. इनका बचपन से लेकर युवावस्था तक का सफर इनकी नानी जी श्रीमती अनारो देवी के साथ गाँव धामड़ में बीता. नानी जी की छत्रछाया में इनके व्यक्तित्व, इनकी सोच का निर्माण हुआ. इन्होने हरियाणवी बोली में रागनी लेखन से शुरुआत की मगर बाद में ग़ज़ल विधा की और मुड़ गए. इनकी ग़ज़लों में किसान, मजदूर, दलित, स्त्री या हाशिये पर खड़े हर वर्ग का चित्रण बड़ी संजीदगी के साथ चित्रित होता है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र में स्वास्थ्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. … Continue readingकिसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

समुंद्र सिंह के दो हरियाणवी गीत

समुंद्र सिंह का जन्म बहलबा, रोहतक हरियाणा में हुआ। इनके यू ट्यूब पर अनेक भजन और गीत, अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, गजल, गीत, भजन,लेख आदि प्रकाशित हुए हैं। अकाशवाणी और दूरदर्शन से भी भजन और गीत प्रसारित हुए हैं ।

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औरत की कहानी – रामफल गौड़

Post Views: 55 रागनी देवी अबला पां की जूत्ती, मिले खिताब हजार मनैं, जब तै बणी सृष्टि, कितने ओट्टे अत्याचार मनैं ।।टेक।। परमगति हो सती बीर की, पति की गैल

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लोक साहित्य : प्रतिरोध की चेतना ही उसकी समृद्धि है – डॉ. अमरनाथ

लोक साहित्य में लोक जीवन का यथार्थ है, पीड़ा है, दुख है, मगर उस दुख और पीड़ा से जूझने का संकल्प भी है, मुठभेड़ करने का साहस भी है. यहां सादगी है, प्रेम है, निष्ठा है, ईमानदारी है और सुसंस्कार है. हमारे लोक साहित्य में लोक का जो उदात्त चरित्र चित्रित है वह शिष्ट साहित्य में दुर्लभ है. शिष्ट साहित्य और लोक साहित्य के बीच का फासला वस्तुत: दो वर्गों के बीच का फासला है. … Continue readingलोक साहित्य : प्रतिरोध की चेतना ही उसकी समृद्धि है – डॉ. अमरनाथ