Tag: लघुकथा

5 लघुकथाएँ- हरभगवान चावला

हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए। तीन कविता संग्रह प्रकाशित हुए और एक कहानी संग्रह। हरभगवान चावला की रचनाएं अपने समय के राजनीतिक-सामाजिक यथार्थ का जीवंत दस्तावेज हैं। सत्ता चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक-सांस्कृतिक उसके चरित्र का उद्घाटन करते हुए पाठक का आलोचनात्मक विवेक जगाकर प्रतिरोध का नैतिक साहस पैदा करना इनकी रचनाओं की खूबी है। हाल ही में हरभगवान चावला को मैथिलीशरण गुप्त श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। हरभगवान चावला जी का एक लघुकथा संग्रह ‘बीसवाँ कोड़ा’ शीर्षक से शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है उसके लिए उन्हें शुभकामनाएं। प्रस्तुत है उनकी पांच लघुकथाएँ- … Continue reading5 लघुकथाएँ- हरभगवान चावला

सुल्तान प्रजा की सेवा के लिये

Post Views: 42 सुल्तान की सवारी निकल रही थी और बूढा फकीर उसके रास्ते में ही बैठा हुआ था। वजीर पंहुचा – बाबा ! दुनियाँ का सबसे ताकतवर सुल्तान इस

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राजा आलोचना नहीं सुनना चाहता

Post Views: 39 राजा और उसके मन्त्री विलासी थे। खजाना खाली हो गया। आश्रमों की वृत्ति बंद हो गयी। ऋषि ने कहा कि  देश की संस्कृति और देश की प्रज्ञा

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क़ानून- हरभगवान  चावला

Post Views: 529 हरभगवान चावला (हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में  कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए।

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इतिहास- हरभगवान  चावला

Post Views: 1,147 हरभगवान चावला (हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में  कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए।

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न्याय- हरभगवान  चावला

Post Views: 389 हरभगवान चावला (हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में  कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए।

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भेड़िया- हरभगवान  चावला

Post Views: 736 हरभगवान चावला (हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में  कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए।

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मैं लड़की हूं न – कृष्ण चन्द्र महादेविया

Post Views: 434 कृष्ण चन्द्र महादेविया लघुकथा बस भरी तो थी किन्तु पाठशाला जाने वाले छोटे और बड़े बच्चे बस में चढ़ आते थे। कुछ अकेले तो कुछ को उनके

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खिलवाड़ – राधेश्याम भारतीय

Post Views: 101 लघुकथा गांव में एक घर की छत ढहने से परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि देखने वालों

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यक्षप्रश्न – राधेश्याम भारतीय

Post Views: 110 लघुकथा गांव में रघबीर की घुड़चढ़ी हो रही थी। जब वे मंदिर के पास पहुंचे तो गांव के कुछ मनचले सवर्ण जाति के लड़कों ने उसे घोड़ी

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