Tag: रामधारी सिंह दिनकर

चाँद और कवि – रामधारी सिंह दिनकर

Post Views: 318 रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है। उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और फिर बेचैन हो जगता न

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यह मनुज- रामधारी सिंह दिनकर

Post Views: 486 यह मनुज, ब्रह्माण्ड का सबसे सुरम्य प्रकाश, कुछ छिपा सकते न जिससे भूमि या आकाश । यह मनुज, जिसकी शिखा उद्दाम । कर रहे जिसको चराचर भक्तियुक्त

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निराशावादी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

Post Views: 310 पर्वत पर, शायद, वृक्ष न कोई शेष बचा धरती पर, शायद, शेष बची है नहीं घास उड़ गया भाप बनकर सरिताओं का पानी, बाकी न सितारे बचे

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