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नया साल

रामधारी खटकड़ नया साल जै ऐसा आज्या , खुल कै खुशी मनाऊँ रै सब सुख तै जीवैं , मैं ऐसी दुनिया चाहूँ…(टेक) बेकारी ना हो किते , हर युवा को रुजगार मिलै बेसहारा कोय ना हो , जिम्मेदार सरकार मिलै लावारिस कोय बच्चा ना हो,सबको घर-परिवार मिलै कन्याओं का मान हो जग म्हं,इन्हें सुखी संसार मिलै यारां का कोय यार

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रामधारी खटकड़

जिला जीन्द के खटकड़ गांव में 10 अप्रैल, 1958 में जन्म। प्रभाकर की शिक्षा प्राप्त की। कहानी, गीत, कविता, कुण्डलियां तथा दोहे लेखन। समसामयिक ज्वलंत विषयों पर दो सौ से अधिक रागनियों की रचना। रागनी-संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। वर्तमान में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक में कार्यरत।

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