Tag Archives: रामकिशन राठी

 उल्टे खूंटे मतना गाडै मै त्यरै ब्याही आ रही सूं

रामकिशन राठी (रामकिशन राठी रोहतक में रहते हैं। कहानी लेखक हैं । हरियाणवी भाषा में भी निरतंर लेखन करते हैं और समाज के भूले-बिसरे व अनचिह्ने नायकों पर लेख लिखकर प्रकाश में लाने का महती कार्य करते हैं -सं.) रागनी उल्टे खूंटे मतना गाडै मै त्यरै ब्याही आ रही सूं लोक-लाज तैं डर लागै सै दुनियां तैं सरमा रही सूं

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नूरू की थाली

रामकिशन राठी  घोड़े दौड़ रहे थे…क्यड़पड़-क्यड़पड़, नगाड़े बज रहे थे…पडग़ड़ाम…पडग़ड़ाम-पडग़ड़ाम… लड़ाई के मैदान के नजारे को बयान करते हुए वह मुंह से ऐसी आवाजें निकालता था जो हूबहू घोड़े की टापों से मिलती-जुलती थी और नगाड़े पर डंके की चोट की आवाज भी मुंह से निकालता था, जैसे वास्तव में नगाड़ा ही बज रहा हो। फिर वह जोश भरे स्वर

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