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प्रार्थना – रविंद्रनाथ टैगोर

Post Views: 18 हो चित्त जहाँ भय-शून्य, माथ हो उन्नतहो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, खुला यह जग होघर की दीवारें बने न कोई काराहो जहाँ सत्य ही स्रोत सभी शब्दों…

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अंतिम बेला में- रविंद्रनाथ ठाकुर, अनुवाद- योगेश शर्मा

योगेश शर्मा कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय में हिंदी स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के छात्र और देस हरियाणा की प्रबन्धन टीम का हिस्सा हैं