ओमप्रकाश ग्रेवाल और आलोचकीय व्यवहार की भूमिका- आनंद प्रकाश

Post Views: 314 संस्मरण सत्तर के दशक की शुरुआत में लिखे दो-तीन निबंधों से ही मार्क्सवादी आलोचना में ओम प्रकाश ग्रेवाल की स्पष्ट पहचान बन गई थी और मित्रों-सहकर्मियों के…

ओमप्रकाश ग्रेवाल और आलोचकीय व्यवहार की भूमिका -आनंद प्रकाश

Post Views: 158 संस्मरण सत्तर के दशक की शुरुआत में लिखे दो-तीन निबंधों से ही मार्क्सवादी आलोचना में ओम प्रकाश ग्रेवाल की स्पष्ट पहचान बन गई थी और मित्रों-सहकर्मियों के…

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हमारा समसमय – रमेश कुंतल मेघ

Post Views: 825 न जाने कब से रूढिय़ों में कै़द समाज काला पानी की जेल लगने लगा है। हमारा विश्वास है कि बंद कोठरियों के ताले तड़ातड़ टूटने लगेंगे। घायल…