Tag: युद्ध और प्रेम

युद्ध और प्रेम -सुरेश बरनवाल

Post Views: 149 कविता युद्ध के दौर में विद्रोह, क्रोध, हिंसा बारूद, बन्दूक और शरीर के चिथड़े मिल जाते थे हर राह टूटे भग्नावशेष कब्रगाह बन गए थे इन्सानी सभ्यता

Continue readingयुद्ध और प्रेम -सुरेश बरनवाल