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मेरे पीछे सूनी राहें और मेरे आगे चौराहा – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 213 ग़ज़ल मेरे पीछे सूनी राहें और मेरे आगे चौराहा, मैं ही मंजि़ल का दीवाना मुझ को ही रोके चौराहा। हर कोई अपनी मंजि़ल के ख़्वाब सजा कर

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