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महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ – एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया

Post Views: 227 गज़ल महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया तेरा दामन हाथ में आकर छूट गया! कितने मंज़र ओझल हुए निगाहों से बेटी से जब…

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ज़ोहरा बाई अम्बाला वाली – महेन्द्र प्रताप चांद

ज़ोहराबाई बहुत ही शिष्ट, सुशील और स्वाभिमानी महिला थीं। फिल्मी दुनिया में वे अपने हर गीत के लिए दो हजार रुपए पारिश्रमिक लेती थीं, जो उस समय एक बहुत बड़ी राशि थी। बसंत देसाई के संगीत में बनी एक फिल्म ‘मतवाला शायर राम जोशी’ में उन्होंने बीस गाने गाये थे और चालीस हजार रुपए पारिश्रमिक लिया था। सन् 1950 के बाद कुछ नई गायिकाएं आ गईं और इन्हें कम पारिश्रमिक पर गाने के लिए कहा गया तो इन्होंने इसे स्वीकार करने की अपेक्षा फिल्मों में गाना ही छोड़ दिया। जबकि अधिकतर कलाकार प्राय: दौलत और शोहरत के पीछे भागते हैं, लेकिन ज़ोहराबाई पब्लिसिटी से बहुत दूर रहती थीं और प्रेस वालों से भी बहुत बिदकती थीं।