Tag Archives: महिला

” झुकना मत “

” झुकना मत “ जैसे ही डाक्टर ने कहा झुकना मत। अब और झुकने की गुंजाइश नही… सुनते ही उसे.. हँसी और रोना , एक साथ आ गया। ज़िंदगी में पहली बार वह किसी के मुँह से सुन रही थी ये शब्द …..।। बचपन से ही वह घर के बड़े, बूढ़ों माता-पिता, चाची, ताई, फूफी,मौसी.. अड़ोस पड़ोस, अलाने-फलाने, और समाज

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अंजू – कृषि और महिलाएं

आलेख हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। प्रदेश की जनसंख्या का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कृषि के कार्य में संलग्न है। यहां के निवासियों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि होने के कारण हमारी अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। कृषि के कार्य में औरत और पुरुष की दोनोंं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।  कृषि के बारे में हम जब विस्तार

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सुमित सौरभ  – महिला की पूर्व निर्धारित भूमिका में बदलाव

सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के संदर्भ में देख कर हम खुश हो सकते हैं, लेकिन ठीक इसी समय राज्य के लैंगिक विकास सूचकांक, लैंगिक समानता सूचकांक के विभिन्न सूचकों को देखकर हमारी सारी खुशी समाप्त

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जगमति सांगवान – महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिया

महिला जब हम छोटे थे तो हमारी दादी-मांओं, चाची-ताइयों से सुना करते थे कि जब आजादी का आंदोलन जारी था तो वो ये गीत बड़े ही चाव से गाया करती थी ‘गाल्यो हे बजा ल्यो छोरियो हे, आजादी आवैगी, हे कासण धोवण-मांजण की मशीन आवैगी’ महिलाओं के जिस तलछट हिस्से की आजादी से आकांक्षाओंं को इंगित करने वाला यह लोकगीत

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मैंने देखी एक लड़की – अनुराधा बेनीवाल

कविता मैंने देखी एक लड़की आज मैंने एक लड़की देखी नदी किनारे पगडंडी पे इठलाती कान में ईयरफोन लगाए, संगीत पे लहराती लड़की देखी आज मैंने एक लड़की देखी। मेरे पीछे चलने से बेख़बर आगे से आते नौजवानों से ना-घबराती मचलती इठलाती मस्त हवा में जम्प लगाती लड़की देखी आज मैंने एक लड़की देखी। बीच-बीच में रुक जाती बसंत के

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हरियाणा: खेलों में उपलब्धियां

हरियाणा प्रांत के खिलाड़ी दुनिया भर में भारतवर्ष का डंका बजा रहे हैं। नवम्बर 1966 को हरियाणा प्रदेश भारत के सत्रहवें राज्य के रूप में मानचित्र पर आया था। पहले से ही सामाजिक पर्वों, उत्सवों व मेलों के अवसरों पर ताकत आजमाने वाले खेलों जैसे कबड्डी, कुश्ती और रस्साकसी आदि खेलों के आयोजन की परम्परा रही है। विश्व स्तर की खेल स्पर्धाओं जैसे एशियाड़, राष्ट्रमंडल तथा ओलम्पिक की खेल प्रतियोगिताओं में भारत के द्वारा जीते गए कुल पदकों में अकेले हरियाणा प्रांत के खिलाड़ियों द्वारा लगभग 35 प्रतिशत पदकों को प्राप्त किया है, जिसमें ताकत के खेल माने जाने वाले कुश्ती, कबड्डी और मुक्केबाजी में सर्वाधिक पदक अर्जित किए हैं।

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सुरे��ा की कविताएं

बागी लड़कियां
मैं जानती हूं
बहुत सारी बागी लड़कियों की पहचान
यहां तक कि उनके
नाम व पते भी
परन्तु आपको नहीं बताउंगी,
वरना हो सकता है
आप उन्हें ढूंढ निकाले
अपने घर के उस अन्दर वाले कमरे में
जिसकी कोई खिड़की बाहर नहीं खुलती।

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दामिनी यादव की कविताएं माहवारी और बिकी हुई कलम

हरियाणा सृजन उत्सव में 23 फरवरी को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में दामिनी यादव ने अपनी माहवारी कविता सुनाई। इस तरह की कविताओं को आमतौर पर सुनाने का रिवाज नहीं है, लेकिन दामिनी ने आधी आबादी के अनुभव को जिन संवेदनशील शब्दों में प्रस्तुत किया और जिस गंभीरता से सुनाया था 500 के करीब मौजूद श्रोता अपने साथ इस कविता को लेकर गए. कविता का टेक्सट और दामिनी की ही आवाज में कविता आपके लिएः

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