प्राण – रवींद्रनाथ टैगोर

Post Views: 8 गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उनकी एक कविता “प्राण” का हरियाणवी में अनुवाद आपके सामने प्रस्तुत है जिसका हिंदी में अनुवाद श्री रामधारी सिंह दिनकर ने…

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सृजन उत्सव में गूंजी सवाल उठाती कविताएँ

देस हरियाणा और सत्यशोधक फाउंडेशन द्वारा 14-15 मार्च को कुरुक्षेत्र स्थित सैनी धर्मशाला में आयोजित हरियाणा सृजन उत्सव में दोनों दिन सवाल उठाने और चेतना पैदा करने वाली कविताएं गूंजती रही। देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं शायर गौहर रज़ा के कविता पाठ के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन रेतपथ के संपादक डॉ. अमित मनोज ने किया।

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सिपाही के मन की बात – मंगतराम शास्त्री

Post Views: 143 कान खोल कै सुणल्यो लोग्गो कहरया दर्द सिपाही का। लोग करैं बदनाम पुलिस का धन्धा लूट कमाई का।। सारी हाणां रहूँ नजर म्ह मेरी नौकरी वरदी की…

सामण का स्वागत – मंगतराम शास्त्री

Post Views: 197 शीळी शीळी बाळ जिब पहाड़ां म्ह तै आण लगै होवैं रूंगटे खड़े गात के भीतरला करणाण लगै राम राचज्या रूई के फोयां ज्यूं बादळ उडण लगैं समझो…

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घाणी फोड़ रही थी जोट न्यूं आपस में बतलाई – मंगतराम शास्त्री

Post Views: 147 (प्रचलित तर्ज- होळी खेल रहे नन्दलाल…)घाणी फोड़ रही थी जोट न्यूं आपस में बतलाईहम रहां माट्टी संग माट्टी, म्हारी जड़ चिन्ता नै चाट्टीपाट्टी पड़ी खेस की गोठ,…

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झूठ कै पांव नहीं होते- मंगत राम शास्त्री

Post Views: 305 मंगतराम शास्त्री झूठ कै पांव नहीं होते सदा जीत ना होया करै छल कपट झूठ बेईमाने की एक न एक दिन सच्चाई बणती पतवार जमाने की झूठ…

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सासड़ होल़ी खेल्लण जाऊंगी- मंगत राम शास्त्री

Post Views: 314 मंगतराम शास्त्री सासड़ होल़ी खेल्लण जाऊंगी, बेशक बदकार खड़े हों। री मनै पकड़ना चावैंगे, जाणूं सूं जाल़ बिछावैंगे ना उनकै काबू आऊंगी, कितनेए हुशियार खड़े हों। हेरी…