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चीफ की दावत- भीष्म साहनी

भीष्म साहनी की कहानी ‘चीफ की दावत’ 1957 में प्रकाशित उनके कहानी संग्रह ‘पहला पाठ’ की सर्वाधिक चर्चित कहानी है. इस कहानी में भीष्म सहनी ने एक कम्पनी में काम करने वाले बेटे की मध्यवर्गीय मानसिकता को चित्रित किया है जिसमें वह अपनी माँ को अपने अधिकारी के समक्ष अप्रस्तुतियोग्य समझता है. अपने अपमान के बावजूद भी माँ अपने बेटे की उन्नति की ही कामना करती है.

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भीष्म साहनी के रचना-कर्म सम्बन्धी विचार – रमणीक मोहन

Post Views: 16 भीष्म साहनी आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रबल हस्ताक्षरों में से एक हैं। 1953 में उन का पहला कहानी संग्रह छपा। 2003 में अपनी अन्तिम कृति छपने तक…

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राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्या – भीष्म साहनी

Post Views: 877 मैं भाषा वैज्ञानिक नहीं हूं, भाषाएं कैसे बनती और विकास पाती हैं, कैसे बदलती हैं, इस बारे में बहुत कम जानता हूं, इसलिए किसी अधिकार के साथ…

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हाय मेरे ईश्वर, मेरे गॉड़, वाहे गुरू, हाय मेरे अल्लाह

Post Views: 196 अमृतलाल मदान  भीष्म साहनी की स्मृति को समर्पित – गूँगा बना दिया गया था मुझे और लँगड़ा भी धर्म-संचालित पिछले भूचाल द्वारा आओ तुम भी देखो जो…