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भीमराव अंबेडकर : संविधान के अप्रतिम शिल्पी

महात्मा गाँधी को अंबेडकर सिर्फ हिन्दुओं का नेता कहते थे, जबकि गाँधी अपने को सभी हिन्दुस्तानियों का नेता मानते थे। वे अपनी ओर से पहल करके अंबेडकर से संवाद की कोशिश करते रहे और उन्हें अपनी सोच से अवगत कराते रहे। गाँधी लगातार अंबेडकर की सोच को समझने की कोशिश भी करते रहे। अस्पृश्यता के विरुद्ध गाँधी भी थे और अंबेडकर भी, लेकिन एक द्रष्टा था दूसरा भोक्ता।

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बुद्ध के सिंद्धांत और उपदेश – डा. भीमराव आंबेडकर

Post Views: 387 डा. आंबेडकर ने एक पुस्तक लिखी ‘बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स ‘। इसमें दोनों दार्शनिकों के सिद्धातों की तुलना की।उन्होंने यह इस उम्मीद से किया था कि इससे वर्तमान में…