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भिक्षुक – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Post Views: 12 कविता भिक्षुक वह आता–दो टूक कलेजे को करता, पछतातापथ पर आता। पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,चल रहा लकुटिया टेक,मुट्ठी भर दाने को — भूख मिटाने कोमुँह…