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माटी के दर्द को वाणी देती पानीदार ग़ज़लें – भागिनाथ वाकले

उदयभानु हंस ने मिथकीय पात्रों को मौजूदा समय की विसंगतियों और नैतिक पतन से जोड़कर यथार्थ रचना की है। डॉ रामजी तिवारी मिथकों के विषय में कहते हैं कि “मिथक जनमानस में पहले से बैठे रहते हैं, उनका आधार लेने से रचना की संप्रेषणीयता ज्यादा हो जाती है।“ इस हेतु ग़ज़लकार ने मिथकों का प्रयोग अपनी रचनाओं में किया है। (लेख से )