Tag Archives: बुद्ध प्रकाश

हरियाणा का इतिहास-प्रारम्भिक काल

बुद्ध प्रकाश वर्तमान हरियाणा राज्य, देश का वह भाग है जहाँ भारतीय संस्कृति अद्भुत, पल्लवित, विकसित एवं समृद्ध हुई है। इतिहास के प्रारम्भ में यहीं पर उन विचारों, मूल्यों एवं आदर्शों की स्थापना हुई है, जो प्रत्येक युग में भारतीय समाज तथा संस्कृति को दिशा प्रदान करते हैं। प्रागैतिहासिक काल के बाद इतिहास के प्रारम्भ में सर्वप्रथम हमारा परिचय भरत

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हरियाणा का इतिहास-कुरु कीर्ति का चरमोत्कर्ष

बुद्ध प्रकाश कालांतर में कुरु साम्राज्य राजनीतिक गौरव तथा आर्थिक उत्थान का केंद्र बन गया। महाभारत से यह पता चलता है कि उस समय कुरुवंश का गौरव तथा समृद्धि पराकाष्ठा पर थी। किंतु इससे पड़ोसी, विशेषतया पूर्व में पांचाल, विरोधी भी हो गए। उसके साथ-साथ सामाजिक विकास के कारण दृष्टिकोण में परिवर्तन आवश्यक हो गया और परम्परा तथ प्रगति अन्तर्विरोध

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महाभारत-युद्ध के दुष्परिणाम

बुद्ध प्रकाश महाभारत में वर्णित अनुसार कुरुओं के पतन से यह क्षेत्र बिल्कुल ही नष्ट-भ्रष्ट हो गया। उपनिषद् में कुरु के पतन का टिड्डीदल द्वारा उनकी फसलों के विनाश का वर्णन है (छान्दोग्योपनिषद् 1, 10, 1) और श्रौत सूत्र में  एक ब्राह्मण द्वारा दिए गए अभिशाप के कारण उनके कुरुक्षेत्र से निर्वासित हो जाने का उल्लेख है। गंगा की बाढ़

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हरियाणा-आक्रमण तथा एकीकरण का इतिहास

बुद्ध प्रकाश इस प्रकार लोग कृषि-कार्य में प्रवृत्त हो गये जबकि पूर्व में साम्राज्य-वादी गतिविधियों तथा उत्तर-पश्चिम में आक्रमणकारी शक्तियों की गति तीव्र से तीव्रतर होती गई। मगध साम्राज्य गंगा तक फैल गया और पंजाब में फारसी तथा मैकडोनियन आक्रमणों का बोलबाला हो गया। इन परिस्थितियों में हरियाणा के लोग सचेत रहे। सिकन्दर ने व्यास पहुंच कर उनकी समृद्धि तथा

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हरियाणा का इतिहास-सैन्य तंत्र का विकास

बुद्ध प्रकाश     चौथी शताब्दी में गुप्त वंश ने उत्तरी भारत को एकता प्रदान की। हरियाणा के लोगों ने उनकी इस कार्रवाई का स्वागत किया तथा यौधेय तथा अन्य लोग उनके साथ मिल गए ‘‘समुद्रगुप्त के इलाहाबाद के स्तम्भ’’ लेख में कहा गया है कि ये लोग ‘‘सभी प्रकार के कर अदा करके, आदेशों का पालन करके तथा अभ्यर्थना

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हरियाणा का इतिहास-राजकीय वैभव के पथ पर

बुद्ध प्रकाश  गुप्त युग में शांतिकाल के दौरान हरियाणा का भौतिक एवं आर्थिक विकास हुआ। यहां के लोग देश के अन्य भागों में फैल गए, जहां वे अपने क्षेत्र का नाम ले गए। गुजरात में बसे लोगों ने मैत्रक सम्राट ध्रुवसेन प्रथम (519-549 ईसवी) के गनेसगद मुद्रणपट्टों में वर्णित बस्ती का नाम हरियाणा रखा, अन्य लोग मत्तमयूर का नाम मध्यप्रदेश

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हरियाणा का इतिहास-प्रतिहारों तथा तोमरों का शासन

बुद्ध प्रकाश हर्ष के पश्चात् उत्तरी भारत इतना कमजोर हो गया कि उस पर कोई भी कब्जा कर सकता था। चीन-तिब्बती आक्रमण से स्थिति अनिश्चित हो गई। कन्नौज के यशोवर्मन के उत्थान से कुछ शक्ति तथा व्यवस्था स्थापित हुई। पूर्वी तथा दक्षिणी भारत पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् उसने हूणों तथा तुर्कों के आक्रमणों को रोकने के लिए श्रीकण्ठ,

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हरियाणा का इतिहास-गज़नी तथा काश्मीर से आक्रमण

बुद्ध प्रकाश ग्यारहवीं शती में, तोमर यद्यपि प्रतिहारों से स्वतंत्र हो गए थे, तथापि उन्हें गजनवी-तुर्कों के आक्रमणों का सामना करना पड़ा। 1014 में महमूद गजनवी ने थानेसर पर आक्रमण करके चक्रतीर्थस्वामिन की प्रतिमा को नष्ट करते हुए मंदिरों को भ्रष्ट कर दिया। तोमर शासक ने गज़नवियों को भगाने के लिए भारतीय शासकों से सहायता की अभ्यर्थना की, ताकि उत्तरी

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हरियाणा का इतिहास-आर्थिक समृद्धि तथा सांस्कृतिक विकास

बुद्ध प्रकाश प्रतिहारों तथा तोमरों के शासन के दौरान हरियाणा में व्यापार, कला तथा संस्कृति सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गई, जिसका आभास हमें दशवीं शताब्दी में लिखित सोमदेव के ‘यशस्तिकलकचम्पू’ से मिलता है। उसका कथन है कि यौधेय देश, अर्थात् हरियाणा प्रदेश पृथ्वी को सुशोभित करता था तथा सुख-समृद्धियों से परिपूर्ण था। यहां के लोग धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

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हरियाणा का इतिहास-कुरुक्षेत्र तथा कम्बोडिया

बुद्ध प्रकाश                प्रगति तथा समृद्धि के इस काल में हरियाणा के लोग विदेशों में जाकर बस गए और वहां बस्तियां बना लीं। सौभाग्यवश कम्बोडिया के एक उपनिवेश के संबंध में कुछ रोचक सूचना उपलब्ध है। वतफू के एक शिलालेख से यह स्पष्ट होता है कि मेकांग नदी के साथ का पूर्वी प्रदेश कुरुक्षेत्र

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