Tag: बालमुकुंद गुप्त

हिन्दी में ‘बिन्दी’ – बालमुकुंद गुप्त

Post Views: 89 काशी की नागरी-प्रचारिणी सभा हिन्दी में ‘बिन्दी’ चलाना चाहती है। यह ‘बिन्दी’ अक्षर के ऊपर नहीं, नीचे हुआ करेगी। ऐसी ‘बिन्दी’ लगाने का मतलब यह है कि

Continue readingहिन्दी में ‘बिन्दी’ – बालमुकुंद गुप्त

भैंस का स्वर्ग – बालमुकुंद गुप्त

सन् 1905 में ‘स्फुट कविताएं’ नाम से बालमुकुंद गुप्त की कविताओं का संग्रह प्रकाशित हुआ। जिसमें उनकी समस्त कविताएं संकलित हैं। ‘भैंस का स्वर्ग’ गुप्त जी की पहली कविता है। … Continue readingभैंस का स्वर्ग – बालमुकुंद गुप्त

दिल्ली से कलकत्ता – बालमुकुंद गुप्त

(16 जनवरी 1899 को भारत मित्र अखबार बालमुकुंद गुप्त के संपादन में प्रकाशित हुआ। इस अंक में दिल्ली से कलकत्ता तक लेख में अपनी यात्रा का वर्णन किया है। इस वृतांत में बालमुकुंद गुप्त की विलक्षण वर्णन क्षमता, संवेदनशीलता और संवेदनशील दृष्टि के दर्शन होते हैं। )
Continue readingदिल्ली से कलकत्ता – बालमुकुंद गुप्त

हँसी-खुशी  – बालमुकुंद गुप्त 

हँसी भीतर आनंद का बाहरी चिन्ह (चिह्न) है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम से उत्तम वस्तु एक बार हँस लेना तथा शरीर के अच्छा रखने की अच्छी से अच्छी दवा एक बार खिलखिला उठना है। पुराने लोग कह गए हैं कि हँसो और पेट फुलाओ। … Continue readingहँसी-खुशी  – बालमुकुंद गुप्त 

हिन्दी की उन्नति – बालमुकुंद गुप्त

Post Views: 383 हिन्दी भाषा के संबंध में शुभ केवल इतना ही देखने में आता है कि कुछ लोगों को इसे उन्नत देखने की इच्छा हुई है। किंतु केवल इच्छा

Continue readingहिन्दी की उन्नति – बालमुकुंद गुप्त

हिंदी भाषा की भूमिका – बालमुकुंद गुप्त

हिन्दी फारसी भाषा का शब्द है। उसका अर्थ है हिन्द से संबंध रखने वाली, अर्थात् हिन्दुस्तान की भाषा। ब्रजभाषा में फारसी, अरबी, तुर्की आदि भाषाओं के मिलने से हिन्दी की सृष्टि हुई। … Continue readingहिंदी भाषा की भूमिका – बालमुकुंद गुप्त

ऐसे में बालमुकुंद गुप्त को याद करना अच्छा लगता है – सुभाष चंद्र

Post Views: 687 टोरी जावें लिबरल आवें। भारतवासी खैर मनावेंनहिं कोई लिबरल नहिं कोई टोरी। जो परनाला सो ही मोरी। ये शब्द हैं  – पत्रकार, संपादक, कवि, बाल-साहित्यकार, भाषाविद्, निबंधकार के रूप

Continue readingऐसे में बालमुकुंद गुप्त को याद करना अच्छा लगता है – सुभाष चंद्र