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बस्स! बहुत हो चुका-ओम प्रकाश वाल्मीकि

Post Views: 66 जब भी देखता हूँ मैं झाड़ू या गंदगी से भरी बाल्टी-कनस्तर किसी हाथ में मेरी रगों में दहकने लगते हैं यातनाओं के कई हज़ार वर्ष एक साथ…