लिंग-संवेदी भाषा की ओर एक कदम – डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 59 डा. सुभाष चंद्र अपने अल्फ़ाज पर नज़र रक्खो, इतनी बेबाक ग़ुफ्तगू न करो, जिनकी क़ायम है झूठ पर अज़मत, सच कभी उनके रूबरू न करो। – बलबीर सिंह राठी…

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ऐसे अपनी दुआ क़ुबूल हुई-बलबीर सिंह राठी

Post Views: 42  ग़ज़ल ऐसे अपनी दुआ क़ुबूल हुई, राह तक मिल सकी न मंजि़ल की, कारवाँ से बिछडऩे वालों को, उन की मंजि़ल कभी नहीं मिलती। खो गई नफ़रतों…

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ये अलग बात बच गई कश्ती -बलबीर सिंह राठी

Post Views: 46  ग़ज़ल   ये अलग बात बच गई कश्ती, वरना साजि़श भंवर ने ख़ूब रची। कह गई कुछ वो बोलती आँखें, चौंक उट्ठी किसी की ख़ामोशी। हम तो…

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पहले कोई ज़ुबाँ तलाश करूँ – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 40  ग़ज़ल पहले कोई ज़ुबाँ तलाश करूँ, फिर नई शोखियाँ1 तलाश करूँ। अपने ख्वाबों की वुसअतों2 के लिए, मैं नये आसमां तलाश करूँ। मंजि़लों की तलाश में निकलूँ,…

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कौन बस्ती में मोजिज़ा गर है -बलबीर सिंह राठी

Post Views: 32  ग़ज़ल कौन बस्ती में मोजिज़ा गर है, हौंसला किस में मुझ से बढ़ कर है। चैन    से   बैठने   नहीं   देता, मुझ में बिफरा हुआ समन्दर है।…

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कौन कहता है कि तुझको हर खुशी मिल जाएगी- बलबीर सिंह राठी

Post Views: 25  ग़ज़ल कौन कहता है कि तुझको हर खुशी मिल जाएगी, हां मगर इस राह में मंजि़ल नई मिल जाएगी। अपनी राहों में अंधेरा तो यक़ीनन है मगर,…

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जिनकी नज़रों में थे रास्ते और भी- बलबीर सिंह राठी

Post Views: 28  ग़ज़ल जिनकी नज़रों में थे रास्ते और भी, जाने क्यों वो भटकते गये और भी। मैं ही वाक़िफ़ था राहों के हर मोड़ से, मैं जिधर भी…

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कैसी लाचारी का आलम है यहाँ चारों तरफ़ – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 66  ग़ज़ल कैसी लाचारी का आलम है यहाँ चारों तरफ़, फैलता जाता है ज़हरीला धुआं चारों तरफ़। जिन पहाड़ों को बना आए थे हम आतिश फ़शां1, अब इन्हीं…

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जो भी लड़ता रहा हर किसी के लिये – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 42  ग़ज़ल जो भी लड़ता रहा हर किसी के लिये, कुछ न कुछ कर गया आदमी के लिये। जो अंधेरे मिटाने को बेताब था, ख़ुद फ़रोज़ां1 हुआ रोशनी…

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करें उम्मीद क्या उस राहबर से – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 34 ग़ज़ल   करें उम्मीद क्या उस राहबर से, जो लौट आया हो मुश्किल रहगुज़र से, जो लगते थे बड़े ही मअतबर1 से, वो कैसे गिर गये मेरी…