Tag: बजरंग बिहारी तिवारी

हाथरस प्रकरण पर तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट- डॉ.पूनम तुषामड़

बीते 11 अक्टूबर, 2020 को दिल्ली से सात लोगों का एक तथ्यान्वेषी दल उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव के लिए रवाना हुआ। इस दल में प्रो. हेमलता महिश्वर, डॉ.रजत रानी मीनू, डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी,डॉ. सीमा माथुर, डॉ. पूनम तुषामड़, फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार व मीडियाकर्मी मनोज पिप्पल शामिल थे। … Continue readingहाथरस प्रकरण पर तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट- डॉ.पूनम तुषामड़

‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 2,340 जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के इतिहास में अमर हैं. उनका

Continue reading‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई – बजरंग बिहारी तिवारी

दलित प्रेम का आशय – ‘प्रेमकथा एहि भांति बिचारहु’ – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 341 बजरंग बिहारी तिवारी प्रेम की सामर्थ्य देखनी हो तो संतों का स्मरण करना चाहिए। संतों में विशेषकर रविदास का। प्रेम की ऐसी बहुआयामी संकल्पना समय से बहुत

Continue readingदलित प्रेम का आशय – ‘प्रेमकथा एहि भांति बिचारहु’ – बजरंग बिहारी तिवारी

हिंदी दलित साहित्य – 2018

Post Views: 839 बजरंग बिहारी तिवारी हिंदी दलित साहित्य : 2018      अन्य भारतीय भाषाओँ की तुलना में हिंदी दलित साहित्य इस मायने में भिन्न है कि यहाँ रचनाकारों की

Continue readingहिंदी दलित साहित्य – 2018

घर की सांकल – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 381 बजरंग बिहारी तिवारी (हरपाल के कविता संग्रह घर की सांकल की समीक्षा) कविता जीवन की सृजनात्मक पुनर्रचना है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के

Continue readingघर की सांकल – बजरंग बिहारी तिवारी

दलित साहित्य: एक अन्तर्यात्रा – कमलानंद झा

Post Views: 404 पठनीय पुस्तक दलित साहित्य के लिए यह शुभ संकेत है कि अब हिंदी में भी लगातार आलोचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित हो रहीं हैं। रचना के साथ-साथ आलोचना का

Continue readingदलित साहित्य: एक अन्तर्यात्रा – कमलानंद झा

साहित्य का स्व-भाव और राजसत्ता – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 744 भारतीय मानस धर्मप्राण है इसलिए भारतीय साहित्य अपने स्वभाव में अध्यात्मवादी, रहस्यवादी है; यह धारणा औपनिवेशिक दौर में बनी। राजनीति में साहित्य की दिलचस्पी आधुनिक काल में

Continue readingसाहित्य का स्व-भाव और राजसत्ता – बजरंग बिहारी तिवारी